कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर मोदी सरकार की नीति में एकरूपता नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यहां पार्टी की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि बातचीत से पहले पाकिस्तान ने हुर्रियत नेताओं के साथ मुलाकात की पहल करके जो माहौल बनाया है उसे देखते हुए स्पष्ट नहीं हो रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत होगी या नहीं। उनका कहना था कि पिछले वर्ष विदेश सचिव स्तर की बातचीत से पहले भी इसी तरह से पाकिस्तान ने हुर्रियत नेताअों से वार्ता की पेशकश की थी , जिसके बाद सरकार ने उसके साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था। इस बार भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गयी है। विदेश नीति को लेकर सरकार को कटघरे में खडा करते हुए उन्होंने कहा कि यह जवाब देने को कोई तैयार नहीं है कि विदेश नीति खुद प्रधानमंत्री बना रहे हैं, प्रधानमंत्री कार्यालय बना रहा है,विदेश मंत्रालय बना रहा है या फिर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय नागपुर में तय हो रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता रविवार को प्रस्तावित है और इसे लेकर अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस स्थिति में भी यदि बातचीत होती भी है तो सरकार ने अब तक बातचीत का एजेंडा ही तय नहीं किया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेश नीति को मजाक बना दिया है। भाजपा एक बात कहती है तो जम्मू कश्मीर में भाजपा गठबंधन वाली सरकार में शामिल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) दूसरी तरह की भाषा का इस्तेमाल करती है। सरकार कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सरकार यह भी नहीं बता रही है कि ऐसे माहौल में वार्ता होगी , तो उसका एजेंडा क्या होगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के बीच रूस के ऊफा में हुई वार्ता के दौरान सहमति बनी थी लेकिन श्री मोदी को ऊफा में बातचीत के लिए जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं थी। ऊफा में बनी सहमति से पहले सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता को लेकर कोई तैयारी ही नहीं की थी। श्री सिंघवी ने कहा कि मोदी सरकार पाकिस्तान नीति को लेकर भ्रम की स्थिति में है। सरकार की नीति में पारदर्शिता, स्पष्टता और निरंतरता नहीं है , जिससे देश का हित प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में दस साल तक चली सरकार ने आतंकवाद को लेकर जो नीति बनाई थी मोदी सरकार ने उस पर पानी फेर दिया है।

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