पुस्तक समीक्षा : दशरथ मांझी का निश्छल प्रेम "पहाड़" - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 11 अगस्त 2015

पुस्तक समीक्षा : दशरथ मांझी का निश्छल प्रेम "पहाड़"


निलय उपाध्याय हिंदी के सुपरिचित कवियों में से एक हैं . पहाड़ श्री उपाध्याय का तीसरा उपन्यास है. श्री उपाध्याय पटकथा लेखन से भी जुड़े हैं . देवों के देव महादेव इनकी चर्चित सीरियल है.

निलय उपाध्याय ने दशरथ मांझी के निश्छल प्रेम को अपने उपन्यास 'पहाड़' में दर्शाया है. दशरथ मांझी बिहार में गया के पास गहलौर गाँव का रहने वाला था .  पत्नी का देहांत डाक्टरी इलाज के अभाव में होगया.  उनके अकेले के परिश्रम ने अजिंक्य लगने वाला पर्वत तोडकर एक किलोमीटर लम्बे, साठ फीट ऊँचे और चालीस फीट चौड़े पहाड़ को काटकर रास्ता बना दिया. 



दशरथ मांझी का अपनी नई नवेली दुल्हन के प्रति प्रेम और दुल्हन के झिझक और प्यार का वर्णन लेखक ने अति स्वाभाविक सरल भाषा में किया है. 


मांझी गहलौर गाँव का नायक और बिहार का सरकारी नायक बना. पहाड़ काट कर रास्ता बना देने के उनके बेमिसाल कारनामे के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनसे काफी प्रभावित थे. उनके गांव के लोग बताते हैं कि एक बार नीतीश ने उन्हें अपनी कुरसी पर बिठा दिया था और कहा था कि आज जो चाहे मांग लीजिये. तब भूमिहीन दशरथ मांझी ने शायद उनसे पांच एकड़ जमीन की मांग की थी, जो खुदा-न-खास्ता उनके जीते जी उन्हें सरकार दे नहीं पायी.

इस उपन्यास में लेखक का प्रकृति प्रेम स्पष्ट परिलक्षित होता है. प्रकृति की रचनाएं,जानवर,पर्वत, पेड़, नदी के विलुप्त होने की टीस लेखक ने बखूबी बयां किया है . 

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