भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश एवं वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र की सत्तारुढ़ गठबंधन सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता को तत्काल रोक देने की सलाह दी है। एक निजी समाचार चैनल को आज दिये खास साक्षात्कार में श्री सिन्हा ने कहा कि भारत के खिलाफ उकसावे वाले व्यवहार के लिए पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को अवांछित व्यक्ति करार देते हुए स्वदेश भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह सोचते हैं कि वह दोनों देशों के बीच जारी उन समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं, जो अभी तक उनके पूर्ववर्ती नहीं कर सके, तो यह उनकी गलतफहमी है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल और वक्त में पाकिस्तान के साथ बातचीत करना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उन सिद्धांतों से मुंह मोड़ना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता एवं आतंकवादी गतिविधियां साथ-साथ नहीं चल सकती। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तर की बातचीत छह जनवरी 2004 के दोनों देशों के संयुक्त वक्तव्य से उलट होगा, जिसमें श्री वाजपेयी ने पड़ोसी देश के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को यह मानने के लिए मजबूत कर दिया था कि पाकिस्तान या उसके कब्जे वाले किसी इलाके से आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देना बातचीत के लिए पूर्व शर्त होगी। संघर्ष विराम के उल्लंघन और गुरदासपुर एवं उधमपुर की घटनाओं के बावजूद बातचीत के लिए तैयार होना, जनवरी 2004 की उपलब्धियों को कूड़ेदान में फेंकने के समान है।

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