पाकिस्तान के साथ बातचीत तुरंत रद्द कर देनी चाहिए : यशवंत सिन्हा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 20 अगस्त 2015

पाकिस्तान के साथ बातचीत तुरंत रद्द कर देनी चाहिए : यशवंत सिन्हा

immidiate-stop-indo-pak-talk-yshwant-sinha
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश एवं वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र की सत्तारुढ़ गठबंधन सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता को तत्काल रोक देने की सलाह दी है। एक निजी समाचार चैनल को आज दिये खास साक्षात्कार में श्री सिन्हा ने कहा कि भारत के खिलाफ उकसावे वाले व्यवहार के लिए पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को अवांछित व्यक्ति करार देते हुए स्वदेश भेज देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह सोचते हैं कि वह दोनों देशों के बीच जारी उन समस्याओं का निराकरण कर सकते हैं, जो अभी तक उनके पूर्ववर्ती नहीं कर सके, तो यह उनकी गलतफहमी है। 

उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल और वक्त में पाकिस्तान के साथ बातचीत करना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उन सिद्धांतों से मुंह मोड़ना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वार्ता एवं आतंकवादी गतिविधियां साथ-साथ नहीं चल सकती। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तर की बातचीत छह जनवरी 2004 के दोनों देशों के संयुक्त वक्तव्य से उलट होगा, जिसमें श्री वाजपेयी ने पड़ोसी देश के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को यह मानने के लिए मजबूत कर दिया था कि पाकिस्तान या उसके कब्जे वाले किसी इलाके से आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देना बातचीत के लिए पूर्व शर्त होगी। संघर्ष विराम के उल्लंघन और गुरदासपुर एवं उधमपुर की घटनाओं के बावजूद बातचीत के लिए तैयार होना, जनवरी 2004 की उपलब्धियों को कूड़ेदान में फेंकने के समान है। 

कोई टिप्पणी नहीं: