मुंबई 20 नवंबर, साख निर्धारक एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कहा है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने से वित्तीय सुदृढ़ीकरण की दिशा में सरकार के लिए चुनौती बढ़ जायेगी तथा सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा। फिच रेटिंग्स ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “सातवें वेतन आयोग द्वारा प्रस्तावित वेतन वृद्धि 2016 कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से लागू की जायेगी। इससे वेतन के मद में केंद्र सरकार का खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 0.5 प्रतिशत बढ़ जायेगा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि राज्य सरकारों के बजट पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि उन पर भी केंद्र सरकार की तर्ज पर वेतन बढ़ोतरी का दबाव होगा।”
उल्लेखनीय है कि सातवें वेतन आयोग ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन में औसतन 23.55 प्रतिशत बढ़ोतरी की सिफारिश की गयी है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार वेतन के मद में बढ़े खर्च की भरपाई के लिए अन्य खर्चों में कटौती का प्रयास करेगी। सब्सिडी जैसे कुछ मोर्चों पर इसकी संभावना बनती है, लेकिन पूँजीगत निवेश में कमी अवांछनीय है, विशेषकर ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयास में निवेश की योजनाएँ बनायी गयी हैं।

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