लंदन 12 नवंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी ब्रिटेन यात्रा के दूसरे दिन लंदन के वेमब्ले स्टेडियम में 60 हजार से अधिक भारतीयों को संबाेधित करेगें। बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की करारी शिकस्त के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला भाषण होगा, जिस पर देश ही नहीं, दुनिया भर के लोगों और मीडिया की निगाहें लगी हुई हैं।
श्री मोदी ब्रिटेन और तुर्की की पांच दिन की यात्रा के लिए आज रवाना हो गए। उनकी इस यात्रा के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत के साथ ही कई समझौते होने के भी संभावना है लेकिन देश में इस वक्त उनके कामकाज के तरीकों पर प्रश्न उठना और बिहार में हार के बाद पार्टी के कई असंतुष्ट नेताओं द्वारा खुले शब्दों में आलोचना उनके 17 महीनों के कार्यकाल का सबसे चुनौतीपूर्ण वक्त माना जा रहा है। ब्रिटेन की मीडिया भी शुक्रवार को वेमब्ले स्टेडियम में चुनाव पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया जानने के लिए आतुर है।
‘द इंडिपेंडेंट’ ने ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी को ब्रिटेन यात्रा से ठीक पहले गहरा झटका’ नामक एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है कि श्री मोदी ब्रिटेन में गर्मजोशी से स्वागत की उम्मीद कर रहे हैं जिसमें वेमब्ले स्टेडियम में उनका भाषण भी शामिल है। वह चुनाव में हार के बाद यहां आ रहे हैं और देश में असहिष्णुता को बढ़ावा देने के आरोपों के कारण भी उनकी सरकार पर काफी दबाव है। द गार्डियन ने भी इसी संबंध में प्रकाशित अपने एक लेख में कहा है कि श्री मोदी ने 30 चुनावी रैलियां करके राज्य चुनाव के पारंपरिक तौर तरीके को बदल किया जो अमूमन स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय नेताओं पर आधारित होता है।
लेख के मुताबिक,“ यह चुनाव हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा मुसलमानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं की पृष्ठभूमि में हुआ। भारत के प्रमुख बुद्धिजीवी देश में बढ़ रही असहिष्णुता की घटनाआें के विरोध में सामने आए हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत में चिंता कितनी व्यापक है लेकिन बिहार में हार इस ओर इशारा कर सकती है कि राष्ट्रीय स्तर पर विकास और स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिकता की भाजपा की रणनीति अब प्रभावहीन हो रही है।”

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