बिहार की जेलों में बंद बड़ी संख्या में कैदी अब भी महरुम हैं कई अधिकारों से - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 15 नवंबर 2015

बिहार की जेलों में बंद बड़ी संख्या में कैदी अब भी महरुम हैं कई अधिकारों से

bihar-prisioners-and-human-rights
पटना,15 नवम्बर, बिहार विधिक सेवा प्राधिकार ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों के कई तरह के कानूनी और मानवाधिकारों से वंचित होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इन्हें दूर करने के लिए शीघ्र कदम उठाने की सरकार से सिफारिश की है । पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं प्राधिकार के सह अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी एन सिन्हा ने आज यहां संवाददाताओं को बताया कि देश में पहली बार किसी राज्य की जेलों में किये गये इस तरह के निरीक्षण में कैदियों के कई तरह के विधिक और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले सामने आये हैं ।न्यायमूर्ति सिन्हा ने बताया कि कई कैदियों को वकील की सेवायें नहीं मिल पाती। प्राधिकार के प्रतिनिधि ने पांच माह में राज्य के सभी 38 जिलों की जेलों का भ्रमण किया और 30070 कैदियों से बात की ।इनमें से 2799 कैदियों को वकील की सेवायें उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं। महिला कैदियों का तो और बुरा हाल है कई महिला कैदी यह कहकर वकील की सेवायें नहीं लेती कि उनके परिजन इस बारे में फैसला करेंगे ।प्रत्येक कैदी को अधिवक्ता की सेवायें मिलना उसका कानूनी अधिकार है । 

न्यायमूर्ति सिन्हा ने बताया कि जेलों में अस्पतालों की हालत भी बहुत खराब है और चिकित्सकों की उपलब्धता बहुत चिंतनीय स्थिति में है ।कई जेलों में चिकित्सक नहीं हैं और जिला  अस्पताल से चिकित्सक जाने पर ही कैदियों का उपचार हो पाता है ।महिला कैदियों को और परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।महिला चिकित्सक न होने से उन्हें कई तरह की दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है ।कैदियों को उपचार के लिये जिला अस्पताल ले जाना बड़ा दुष्कर कार्य है ।इस समस्या का तत्काल हल निकालने की आवश्यकता है । प्राधिकार के सह अध्यक्ष ने बताया कि कैदियों से मुलाकात करने में भी परिजनों-रिश्तेदारों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।कई जेलों में एक खिड़की से ही कई कैदियों को मुलाकातियों से मिलने को कहा जाता है जिससे कोई भी अपनी बात कह या सुन नहीं पाता । इस दिक्कत को दूर करना जरुरी है ।

उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण बात भी सामने आयी कि भूकम्प आने की स्थिति में कैदियों को तत्काल खुली जगह पर ले जाने की कोई सुविधा नहीं है । कैदियों को बैरक या जेल कोठरी से आपात स्थिति में तुरंत निकाल पाना आसान नहीं है ।इस ओर भी तत्काल ध्यान देने की जरुरत है । न्यायमूर्ति सिन्हा ने बताया कि इसके अलावा कैदियों को कई और तरह समस्यायें हैं जिनकी ओर जिला प्रशासन और राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया है और उन्हें दूर  करने की सिफारिश की गयी है ।उन्होंने बताया कि अभियुक्तों को आरोप पत्र की प्रति उपलब्ध कराने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए संबंधित पक्षों को निर्देश दे दिये गये हैं ।

उन्होंने बताया कि कैदियों की दिक्कतों के संबंध में जिला प्रशासन और राज्य सरकार के गृह सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को जेल निरीक्षण रिपोर्ट के साथ ही प्राधिकार की  सिफारिशें भेज दी गयी हैं । जेलों का निरीक्षण और कैदियों से व्यक्तिगत रुप से बातचीत मानवाधिकार कार्यकर्ता सुश्री स्मिता चक्रवर्ती ने की।उन्होंने राज्य के सभी 38 जिलों की 58 जेलों का करीब पांच  माह में भ्रमण किया ।सुश्री चक्रवर्ती ने इस दौरान 30070 कैदियों से बातचीत की और उनकी दिक्कतें सुनीं।

कोई टिप्पणी नहीं: