नयी दिल्ली 14 नवंबर, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला करते हुए आज कहा कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने की बजाय ब्रिटिश हुकूमत का गुणगान किया था, अाज सत्ता की कमान उन्हीं हाथों में है और वे देश का इतिहास बदलने की कोशिश कर रहे हैं। श्रीमती गांधी ने यहां देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 125वीं जयंती वर्ष के पार्टी द्वारा आयोजित समापन समारोह ‘नेहरू स्मरोणत्सव’ को संबोधित करते हुए भाजपा और संघ का नाम लिए बिना कहा कि जिस विचारधारा के मानने वाले आज दूसरों को देशप्रेमी या देशद्रोही होने का प्रमाण पत्र बांटने के ठेकेदार बने हैं, वे आजादी के आंदोलन के दौरान न सिर्फ़ अपने घरों में छुपे थे, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के गुणगान कर रहे थे। उन्होंने कहा, “गांधी जी ने 1942 में जब भारत-छोड़ो आंदोलन शुरू किया, तो हिंदुस्तान में दो संगठन थे जिन्होंने खुल्लम-खुल्ला इस आंदोलन का विरोध किया। इनमें से एक ने पाकिस्तान बनाया और दूसरे के हाथ में आज सत्ता पक्ष का असली रिमोट कंट्रोलर है। उन दोनों संगठनों ने अपने सदस्यों को आदेश दिया- कि वह इस आंदोलन का बहिष्कार करें। यह इतिहास है, आज की सरकार कितना भी इतिहास बदलना चाहे, मगर वह इस इतिहास को नहीं बदल सकती।” श्रीमती गांधी ने कहा कि ये उस विचारधारा के लोग हैं जो देश की आजादी के आंदोलन के दौरान हुकूमत के खि़लाफ़ चुप रहे, एक प्रस्ताव पारित नहीं किया, एक जुलूस नहीं निकाला और एक नारा नहीं लगाया।
श्रीमती गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर परोक्षरूप से हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग, अपनी सांप्रदायिक योजनाओं पर दुनिया के सामने पर्दा डालने के लिए विकास की डफली बजाते रहते हैं और विकास का नाम मंत्र की तरह दोहराते हैं। उन्होंने विकास के अर्थ बदल दिए हैं। उनके लिए विकास का मतलब है किसानों की ज़मीन छीनना, मज़दूरों का हक़ मारना। उनके सबका साथ, सबका विकास का मतलब है कि सिर्फ़ दो-चार पूंजी-पतियों का विकास हो। उन्होंने इसे दुर्दशा करार दिया और कहा कि सच्चा विकास नेहरू जी ने किया था उनके लिए विकास शब्द का सही मायने था कि सबका विकास । उन्होंने कहा कि देश के विकास की बात आती है तो यह संभव ही नहीं है कि इस संदर्भ में नेहरू जी का नाम नहीं आए। आजाद भारत में सबसे पहले विकास की नींव नेहरू जी ने रखी। उन्होंने बांध बनाए, नहरें बनायी, मज़दूरों के लिए रोजी रोटी के अवसर पैदा करने के लिए कारखाने और मिलें खुलवायी और वैज्ञानिकों के काम करने के लिए शोध संस्थान स्थापित किए। नेहरू जी के दौर का यह विकास आम हिंदुस्तानी का विकास था और उनके विकास का मतलब भी आम भारतीय का विकास था। पंडित नेहरू को सूरज का प्रतीक मानते हुए उन्होंने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री ने देश के विकास की गहरी नींव रखी थी और असहिष्णुता का माहौल पैदा करके उनके योगदान को भुलाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन 27 मई 1964 भले ही यह सूरज डूब गया, मगर उसका उजाला हमारे दिलों, हमारी यादों, हमारी आंखों में आज भी जगमगा रहा है और जो लोग देश और समाज में अन्याय, कट्टरता, असहनशीलता, सांप्रदायिकता और अंध-विश्वास फैलाने का षड्यंत्र कर रहे हैं देश को वही उजाला सही रास्ता दिखाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने संविधान निर्माण में नेहरू के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने व्यवहार और कर्म से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बढ़ाया था। उन्होंने लोकतंत्र को गहरायी से इस धरती में बोया और इस तरह सींचा कि वह आज एक घना पेड़ बन चुका है और उसकी जड़ें इतनी गहरी और मजबूत हैं कि तानाशाही की कोई भी आंधी इस पेड़ को उखाड़ नहीं सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब है, जनता की राय की इज्ज़त। नेहरू जी ने इन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाते हुए अपने विरोधियों और अपनी विपरीत विचारधारा के लोगों का सम्मान करते हुए उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान किया था। उनका कहना था कि जहां संवाद है और विरोधियों के साथ वाद विवाद है, वहीं लोकतंत्र है जहां इसका अभाव है, वह लोकतंत्र की सोच नहीं है। यह जनतंत्र का ढंग नहीं है और यह तानाशाही का तरीका है। श्रीमती गांधी ने कहा कि आज का माहौल घुटन का है। घुटन के इस माहौल को देखकर स्वाभाविक रूप से हमें वह अच्छे दिन याद आते हैं। वे अच्छे दिन जब इस देश के प्रधानमंत्री नेहरू जी थे। उन दिनों हर नागरिक अपने मन की बात कह सकता था। उस समय मन की बात किसी रेडियो प्रोग्राम का नाम नहीं था।
श्रीमती गांधी ने कहा कि नेहरू जी ने लोकतंत्र की जो नींव रखी थी, उसको कोई ताकत हिला नहीं सकती। देश को समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का जो सिद्धांत उन्होंने दिया, उसमें ही देश की खुशहाली निहित थी । आज जो भी धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का विरोध करते हैं, वे सिर्फ नेहरू जी का नहीं बल्कि महात्मा गांधी , उनके तमाम साथियों और हमारे महान नेताओं का भी विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेहरू जी में देशप्रेम कूट कूटकर भरा हुआ था। वह चाहते तो ऐशो आराम की जिंदगी जीते लेकिन उन्होंने आजादी के संघर्ष का रास्ता चुना जहां अंग्रेज हुकूमत की गोलियां और लाठियां चलती थीं। इस रास्ते में हर मोड़ पर जेल और और काल कोठरियां थीं। उनके जीवन के कई वर्ष जेलों में ही बीते। श्रीमती गांधी ने कहा कि गांधी जी से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने एक ऐसे भारत के लिए जीवन समर्पित किया, जहां खुशहाली, एकता, शांति, विद्या और विज्ञान का उजाला हो तथा जहां अंध-विश्वास का अंधेरा नहीं हो लेकिन आज कुछ शक्तियां इस नज़रिए को तोड़ने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि नेहरू जयंती पर हमें संकल्प लेना है कि उनकी विरासत को न बिखरने देंगे और न बर्बाद होने देंगे।

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