पटना, 22 नवम्बर।, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 17 नवम्बर को लालगंज में घटी घटना को अत्यन्त दुःखद घटना मानती है। इस घटना में थाना प्रभारी सहित चार लोगों की मौत हुयी थी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का सात सदस्यीय एक प्रतिनिधि मंडल 19 नवम्बर को घटना स्थल का दौरा किया। इसमें पार्टी की राज्य परिषद के सदस्य तथा वैषाली जिला के सचिव अमृत गिरी के अलावे इन्दुभूषण सिंह विनय, अषोक ठाकुर, विष्वनाथ सिंह, भिखारी सिंह, महेन्द्र सिंह और हरि नारायण ठाकुर शामिल थे। घटना से संबंधित पार्टी के जाँच दल के सामने जो तथ्य आए उनके आधार पर यही कहा जा सकता है कि स्थानीय पुलिस की लापरवाही, अक्षमता और अदूरदर्षित की वजह से स्थिति विगड़ी। पिकपभान के तेज गति से चलने के कारण अजरपुर के राजेन्द्र चैधरी और उनकी दुधमंुही पोती की मौत भान से कुचलाकर हो गयी। स्थानीय भान के चालक को गिरफ्तार किया गया। स्थिति शांति हो गयी ।
जँच दल को यह बताया गया कि इस पिकपभान से एक महिला भी घायल हुयी थी। बाद में यह अफवाह फैला कि उस महिला की भी मौत हो गयी। इस अफवाह ने आग में घी का काम किया। आसपास के लोग उत्तेजित हुए लेकिन पुलिस दल इतना कमजोर था कि वह उत्तेजित भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सका उल्टे बिना सोचे समझे भीड़ को तितर वितर करने की चेतावनी वाली कोई कार्रवाई किये बिना पुलिस ने फायरिंग की जिसमें दो युवक घायल हो गए। इलाज के दौरान उसमें एक युवक की मौत हो गयी। तीन मौत से लोग और अधिक उत्तेजित हो गए। पुलिस और स्थानीय लोगों में कठोर झड़प हुयी जिसमें स्थानीय थाना प्रभारी अजित कुमार बुरी तरह घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। अनियंत्रित भीड़ ने पिकपभान के चालक के घर सहित तीन घरों में आग लगा दी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जाँच दल की स्पष्ट समझ है कि पुलिस घटना स्थल पर बहुत विलम्ब से पहुँची। पुलिस ने घटना को हल्के ढं़ग से लिया। भीड़ पर गोली चलाने के पूर्व पुलिस ने न तो लाठीचार्य किया, न हवाई फायरिंग की और नहीं अश्रुगैस के गोले छोड़े। पुलिस ने अदूरदर्षिता दिखाते हुए भीड़ पर फायरिंग कर दी। यह पुलिस की गलती है जिसमें घटना को बेकाबू बना दिया। घायल महिला के मरने के अफवाह ने भी आग में घी का काम किया।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मांग करती है कि 1. मृतकों के परिवारों को बतौर मुआवजा 10-10 लाख रुपये दिये जाॅंय 2. घटना की न्यायिक जाॅंच की जाय 3. इलाके में शांति और सौहार्द का वातावरण बनाने के लिए राजनीतिक दलों, समाज सेवियों, बुद्धिजीवियों आदि के साथ मिलकर स्थानीय पुलिस प्रषासन प्रभावकारी कदम उठावें।

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