बिहार : जनता से किए वादे अमल में लाये सरकार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 22 नवंबर 2015

बिहार : जनता से किए वादे अमल में लाये सरकार

  • महज भूमि विवाद का हल नहीं, जरूरत है भूमि सुधार को समग्रता में किया जाए लागू
  • गरीबों के न्याय की हो गारंटी, तमाम आंदोलनकारियों पर से फर्जी मुकदमे वापस हो
  • सांप्रदायिक घटना के साथ-साथ दलित व महिला उत्पीड़न के मामले में भी संबंधित डीएम-एसपी को बनाया जाए जवाबदेह.
  • 1-6 दिसंबर तक वाम दलों का संयुक्त सांप्रदायिकता विरोधी अभियान

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पटना 22 नवंबर 2015, बिहार विधानसभा चुनाव की समाप्ति के उपरांत बिहार के 6 वाम दलों की संयुक्त बैठक आज 22 नवंबर को भाकपा-माले राज्य कार्यालय में हुई. बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), भाकपा-माले, एसयूसीआईसी, आरएसपी और अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाॅक के नेताओं ने भाग लिया.

 बैठक में माले के राज्य सचिव कुणाल, केंद्रीय कमिटी सदस्य नंद किशोर प्रसाद व केडी यादव, सीपीआई के राज्य सचिव काॅ. सत्यनारायण सिंह, रामबाबू कुमार; सीपीएम के राज्य सचिव अवधेश कुमार, वरिष्ठ नेता काॅ. विजयकांत ठाकुर, अरूण कुमार मिश्रा, एसयूसीआई(सी )के राज्य कमिटी सदस्य एम के पाठक, अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाॅक के अशोक कुमार और आरएसपी के महेश प्रसाद सिंह ने भाग लिया. बैठक की अध्यक्षता सीपीआई राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह ने की.

बैठक के उपरांत वाम नेताओं ने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने भाजपा गठबंधन को करारी शिकस्त दी है, इससे पूरे देश को राहत मिली है. कारपोरेट भाजपा के खिलाफ विक्षोभ इतना तीखा था कि उसका फायदा महागठबंधन को मिल गया. वाम ब्लाॅक को बिहार की जनता ने तकरीबन 14 लाख वोट दिए हैं और विधानसभा के अंदर भी उसकी ताकत बढ़ी है. सांप्रदायिकता फैलाने की साजिश को जनता ने नामाम कर दिया. वाम दलों ने बिहार की जनता को कारपोरटपरस्त व सांप्रदायिक भाजपा को शिकस्त व वाम ब्लाॅक की मजबूती के लिए वाम कतारों को बधाई देती है.

उन्होंने आगे कहा कि नई सरकार से बिहार की जनता को काफी उम्मीदें हैं. देखना यह है कि अपने वादे को पूरा करने की दिशा में नीतीश कुमार की सरकार किन नीतियों पर आगे बढ़ती है? इस पर हमारी व बिहार की जनता की कड़ी निगाह होगी. उन्होंने आगे कहा कि बिहार के विकास की असली कुंजी भूमि सुधार है. पिछले 25 वर्षों से बिहार में लालू-नीतीश की ही सरकार रही है लेकिन भूमि सुधार का एजेंडा लगातार हाशिए पर डाल दिया गया है. जाति जनगणना का उदाहरण देते हुए लालू प्रसाद खुद इस तथ्य की चर्चा बार-बार कर रहे हैं कि दलित-पिछड़ी जाति के लोग भूमिहीनता के शिकार हैं. तब यह स्वभाविक सवाल उठता है कि आखिर वे कौन सी वजहें हैं, जिसके कारण आज तक बिहार में भूमि सुधार का एजेंडा लागू नहीं हो सका है? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि विवाद के निपटारे की बात की है, लेकिन आज जरूरत है भूमि सुधार को लागू करने की. बिहार में सच्चे बदलाव के लिए भूमि सुधार, बटाईदारी कानून आदि सवालों पर वाम दल एकताबद्ध होकर आंदोलन जारी रखेंगे.

वाम नेताओं ने आगे कहा कि बिहार के दलितों-गरीबों-अल्पसंख्यकों के न्याय का सवाल भी एक महत्वूपर्ण सवाल है. कोबरापोस्ट स्टिंग ने इस तथ्य का एक बार फिर से खुलासा किया है कि कैसे भाजपा नेताओं के संरक्षण में बर्बर रणवीर सेना ने बिहार में दलितों-गरीबों के जनसंहार रचाए. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन हत्यारों को नीतीश शासन में थोक भाव में बरी कर दिया गया. नीतीश कुमार आज जिस कानून के राज की दुहाइयां दे रहे हैं, उसमें यह सवाल प्रमुखता से खड़ा होता है कि क्या गरीबों-दलितों को न्याय मिल सकेगा? भागलपुर दंगा पीडि़तों के न्याय का सवाल भी एक बड़ा सवाल है. टाडा के तहत माले के निर्दोष कार्यकत्र्ताओं व नेताओं को आज भी टाडा के तहत जेल में बंद रखा गया है.

आंदोलकारी नेताओं पर फर्जी मुकदमे व उन्हें जेल में डालने की घटनायें भी बढ़ गयी हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले तीन माले उम्मीदवारों को जेल में डाल दिया गया. वहीं, चुनाव बाद मांझी में सीपीएम नेता पर जानलेवा हमला किया गया. फर्जी मुकदमों की वापसी व न्याय की गारंटी के लिए वाम दल संयुक्त आंदोलन चलायेंगे. अपने राष्ट्रीय अभियान के तहत वाम दल 1 से 6 दिसंबर तक सांप्रदायिकता विरोधी अभियान चलायेंगे. उन्होंने आगे कहा कि सांप्रदायिक घटना के साथ-साथ दलित व महिला उत्पीड़न के संदर्भ में भी संबंधित डीएम-एसपी को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. सूखे की वजह से धान की फसल की भारी क्षति हुई है. वाम दलों ने किसानों के लिए समुचित फसल क्षति मुआवजा की भी मांग की.

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