नयी दिल्ली 21 नवम्बर, कांग्रेस ने आज पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर पलटवार करते हुए कहा कि वह राज्य में कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर अपनी नाकामियां छिपाने के लिए पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दूसरे नेताओं पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आज यहां एक बयान में कहा कि उनकी पार्टी को देशभक्ति और राष्ट्रवाद पर सुखबीर सिंह बादल जैसे लोगों से नसीहत नहीं चाहिये, जिनके पिता और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने खालिस्तान आंदोलन के दौरान संविधान की प्रतियां जलायी थीं। उन्होंने कहा कि श्री बादल और उनके पिता पंजाब में कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गये हैं और कांग्रेस तथा उसके नेताओं पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
उल्लेखनीय है श्री बादल ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए आतंकवादियों के साथ सांठगांठ कर राज्य में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने गत 10 नवम्बर को अमृतसर में एक रैली में अलगाववादी तथा आतंकवादी तत्वों के साथ मंच साझा किया था। इस रैली में खालिस्तान बनाने के संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया था। अमृतसर में हुए सरबत खालसा का जिक्र करते हुए श्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जो बादल सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को प्रदर्शित करता है। यह भीड़ खालिस्तान के समर्थन में नहीं थी जैसा कि श्री बादल और खालिस्तान के हिमायती सिमरनजीत सिंह मान जताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह पहले श्री बादल कह रहे थे कि इसके पीछे आईएसआई का हाथ है और अचानक उन्होंने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी पार्टी है जिसने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए कई बलिदान दिये हैं और आगे भी इसके लिए तैयार है।” सरबत खालसा में कांग्रेस के नेताओं के हिस्सा लेने का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक धार्मिक सम्मेलन था, राजनीतिक या देश विरोधी नहीं। ऐसे में एक सिख के तौर पर इसमें हिस्सा लेने में कोई बुराई नहीं है। इसमें कांग्रेस के ही नहीं बल्कि बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी शिरकत की। श्री बादल के इस दावे पर कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि सरबत खालसा में देशविरोधी प्रस्ताव पारित हुआ था, श्री सिंह ने कहा कि अगर ऐसा हुआ था तो बतौर उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री वह क्या कर रहे थे। क्या उनकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर आरोप लगाने से खत्म हो जाती है। बेहतर होगा कि वह इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दें। वह अपनी नाकामियों के लिए कांग्रेस को बदनाम कर रहे हैं।
श्री सिंह ने कहा, “पदयात्रा के दौरान जिस तरह श्री गांधी का स्वागत हुआ और जनसैलाब उमड़ा, उससे श्री बादल और उनके पिता का घबराना स्वाभाविक है। इन लोगों की हिम्मत नहीं है कि वे इस तरह लोगों के बीच जायें। लोगों में सरकार के प्रति बेहद गुस्सा है और अकाली दल के नेताओं, विधायकों और मंत्रियों को जनाक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।”

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