नयी दिल्ली, 21 नवंबर, कांग्रेस ने आज आरोप लगाया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से केंद्रीय कर्मचारियों को घोर निराशा हुई है क्योंकि ये उनकी उम्मीदों और आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता अजय माकन ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों खासकर निचली श्रेणी के कर्मचारियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं के साथ धोखा है। इससे साबित होता है कि मोदी सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के आर्थिक हालात बेहतर बनाने को लेकर गंभीर नहीं है। आयोग की सिफारिशों में 24 प्रतिशत वेतन वृद्धि का दावा किया गया है लेकिन असल में यह 14.29 प्रतिशत है जबकि पांचवें और छठे वेतन आयोग में कम से कम 40 प्रतिशत वेतन वृद्धि की गई थी। श्री माकन ने कहा कि आयोग ने सबसे कम और सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बीच अंतर को बढ़ाकर 1:14 करने की सिफारिश की है जबकि छठे वेतन आयोग ने इसे 1:8 करने की सिफारिश की थी।
वर्तमान में यह 1:12 है। इस तरह आयोग ने उच्च अधिकारियों को फायदा पहुंचाया है। इसी तरह छठे वेतन आयोग ने वार्षिक बढ़ोतरी तीन से चार प्रतिशत रखने की सिफारिश की थी जबकि सातवें वेतन आयोग ने इसे तीन प्रतिशत तक ही सीमित रखा है। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग ने 52 भत्तों को बंद करने और यात्रा भत्ते को महंगाई भत्ते से अलग करने की सिफारिश की है। इससे यात्रा भत्ता महंगाई बढ़ने के साथ नहीं बढ़ पायेगा और कर्मचारियों को नुकसान होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को ये सिफारिशें प्रेषित नहीं की गई हैं जिससे केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और प्रोफेसरों को एक जनवरी 2016 से इसका लाभ नहीं मिल पायेगा। सैनिकों के बीच भी इसे लेकर खासा रोष है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में कम से कम 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी चाहिए, भत्तों को बरकरार रखना चाहिये, यात्रा भत्ते को महंगाई भत्ते से अलग नहीं करना चाहिए और वार्षिक बढ़ोतरी तीन से चार प्रतिशत रखनी चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें