रोशनी में डूबी धरती, जगमग हुआ आसमान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 11 नवंबर 2015

रोशनी में डूबी धरती, जगमग हुआ आसमान

  • दीपोत्सव के उल्लास में डूबा देश 
  • घर-घर हुई समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता श्रीगणेश की पूजा 

dhanteras
जलाओं दीये पर रहे ध्यान इतना अंधेरा धरा पर कहीं न रह जाय, लगी रोशनी की झड़ी झूम ऐसी निशा की गली में तिमिर राह भूले।। कुछ इसी अंदाज में देशभर में रोशनी का त्योहार दीवाली धूमधाम से मनाया जा रहा है। रंगोली और मां लक्ष्मी के चरणों के प्रतीकों के साथ दीपावली पर घरों में मां लक्ष्मी के आगमन की उत्सुकता और विघ्नहर्ता श्रीगणेश की कृपा की लालसा लोगों में साफ झलक रही थी। धर के अंदर और बाहर दीयों की लगी कतार में जगमगाती रोशनी जहां धरती को दीपोत्सव के सतरंगी रोशनी से सराबोर कर रही थी तो दूसरी ओर आसमान में बिखरी आतिशबाजी के रंग उल्लास और खुशी की दास्ता बता रहे थे। शाम ढलते ही पूरा देश रोशनी से नहा उठी थी तो बिजली की झालर धरती को प्रकाशित कर रही थी। बच्चे, बूढ़े और जवान सभी आतिशबाजी के उल्लास में खुद को डूबोए हुए थे। देर रात तक आतिशबाजी के बीच पूरा शहर से लेकर देहात तक दीपावली के रंग में रंगा नजर आया। 

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यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय और लोगों के जीवन में खुशियां, शांति एवं संपन्नता लाने का प्रतीक है। धर्म एवं आस्था की नगरी काशी के घाट हो या फिर गली-मुहल्ले व सड़के सबके सब रोशनी में डूबी नजर आई। रोशनी का मनमोहक नजारा मां गंगा की आरती के वक्त लोगों को खूब भाया। देर रात तक दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट पर हर-हर गंगे के जयकारे गूंजते रहे। ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के साथ दुनिया के लिए मंगल कामना की। 40 मिनट तक चलने वाली गंगा आरती में दोनों ही घाटों पर श्रद्धालु आरती में शामिल होते हैं। मान्यता है कि “मां गंगा साक्षात देवी के रूप में धरती पर खुद उतरी हैं। आरती में शामिल लोगों को मां गंगा आशीर्वाद देती हैं। मां गंगा महादेव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी तक आई हैं। काशी में बाबा विश्वनाथ के साथ वह साक्षात् नजर आती हैं। देव उत्सव इसीलिए काशी में ही मनाया गया था।” 

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इस बार दीपावली में पारंपरिक दीयों के साथ ही डिजाइनर दीयों की बाजार में काफी धूम रही। सामान्य मोमबत्तियों की जगह सुगंधित मोमबत्तियों को लोगों ने चाव से खरीदा। इसके अलावा चीन निर्मित दीये, लैम्प, लाइट और रेडीमेड रंगोलियां भी बाजार में छाई रहीं। लोगों ने दिवाली के अवसर पर अहले सुबह उठकर नए परिधानों में पूजा-अर्चना की और फिर से पटाखे जलाए। लोगों ने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों को दिवाली की बधाइयां दी। ज्यादातर घरों में सुबह से ही दिवाली की बधाई देने के लिए फोन का बजना शुरू हो गया था। दिनभर लोग घरों को सजाने में व्यस्त रहे, शाम होते ही दीये जलाने और लक्ष्मी पूजा में जुट गए। पश्चिम बंगाल में आज के दिन काली पूजा की धूम है। देश के अलावा विदेशों में भी दीपावली उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उत्साह से भरे लोगों ने इस मौके को धूमधाम से मनाने के लिए अपने घरों और दुकानों को रोशन किया है। प्रमुख इमारतों पर भी रोशनी के खास इंतजाम किए गए हैं। बाजारों में जबर्दस्त रौनक है। पूरा शहर शाम ढलते ही रोशनी से जगमगा उठा। धनतेरस और रूप चैदस (छोटी दिवाली) के दिन भी बाजारों में रौनक छाई रही और लोग लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, पूजन सामग्री, घरों के लिए खूबसूरत सजावटी सामान, बंदनवार, दीयों और झिलमिलाती रोशनी बिखेरती आकर्षक लडि़यों, रंगोली के रंग और इस पर्व से जुड़े अन्य खास सामान की खरीदारी करते दिखाई दिए। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक चलने वाले पांच दिनों के इस उत्सव में इस बार धनतेरस के दिन सोना-चांदी खरीदने के रिवाज को लेकर भी लोगों का काफी उत्साह देखने को मिला। त्योहार से ठीक पहले सोने चांदी की कीमतों में गिरावट के कारण सर्राफा बाजार में धनतेरस की धूम रही।

दीपावली पर्व मां लक्ष्मी की उत्पत्ति की मान्यता से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन से घर में समृद्धि और खुशहाली आती है। दिवाली का यह पांच दिवसीय पर्व क्षीर सागर के मंथन से पैदा हुई लक्ष्मी के जन्म दिवस से शुरू होता है। माना जाता है कि दीपावली की रात ही मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना था और उनसे विवाह रचाया था। इस दिन लक्ष्मी के साथ ही विघ्नहर्ता गणेश, संगीत और ज्ञान की देवी सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विधान है। कुछ लोग दीपावली को भगवान विष्णु के वैकुण्ठ लौटने के दिन के रूप में मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो लोग लक्ष्मी पूजन करते हैं मां लक्ष्मी उनसे प्रसन्न रहती हैं और वे पूरे वर्षभर खुशहाल रहते हैं। 






(सुरेश गांधी)

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