लखनऊ 15 नवम्बर, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक दलो में महागठबंधन की सुगबुगाहट शुरु हो गयी है। बिहार में महागठबंधन में शामिल लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस सिलसिले में पहल करनी शुरु कर दी है और इस सिलसिले में श्री यादव इसी महीने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर सकते हैं। राजद उत्तर प्रदेश विधानसभा के 2017 में होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन चाहता है ताकि भारतीय जनता पार्टी को हाशिये पर रखा जा सके। राजद के साथ ही कांग्रेस ने भी कुछ ऐसी ही मंशा जाहिर की है। राजद के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह ने आज यहां से कहा कि श्री लालू प्रसाद यादव जल्दी ही यहां आयेंगे और धर्मनिरपेक्ष दलो को एकजुट करने का प्रयास करेंगे ताकि 2017 के चुनाव में साम्प्रदायिक दलो को हराया जा सके। उन्होंने बताया कि राजद अध्यक्ष इस समय श्री नीतिश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह और छठ पर्व को लेकर व्यस्त हैं। बीस नवम्बर के बाद वह यहां आयेंगे और इस सम्बन्ध में राजनीतिक दलो से बात करेंगे।
उन्होने बताया कि लालू प्रसाद यादव परिवार समेत 21 नवम्बर को इटावा के सैफई गांव आयेंगे,जहां वह सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के 76वें जन्मदिवस पर आयोजित समारोह में शिरकत करेंगे। इस दौरान महागठबंधन पर दोनो नेताओं के बीच बात होने की सम्भावना है। श्री सिंह ने कहा कि भाजपा के खिलाफ बिहार से चली हवा को पूरे देश में ले जाना है। बिहार के बाद भाजपा के खिलाफ सबसे अच्छा माहौल उत्तर प्रदेश में ही है। दोनों राज्यों के गैरभाजपाई दल एक हो जाये तो केन्द्र में भी भाजपा की चूले हिल जाएंगी। उन्होंने कहा “सपा का सहयोग मिला तो लोकसभा की 71 सीटे जीतने वाले राज्य उत्तर प्रदेश से भाजपा को उखाड फेंका जाएगा।” एक सवाल के जवाब में श्री सिंह ने कहा कि राजद उत्तर प्रदेश में चुनाव लडता है या नहीं लडता है इससे ज्यादा जरुरी है कि गैरभाजपा मतो का विभाजन रोका जाय। बिहार चुनाव जीतने के बाद राजद अध्यक्ष ने घोषणा की थी वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी लालटेन लेकर जाएंगे और देखेंगे कि अपने दावे के मुताबिक श्री मोदी ने कुछ विकास कार्य किया है या नहीं। गौरतलब है कि सपा ने बिहार में महागठबंधन से अलग होकर चुनाव लडा था और 145 सीटो पर उम्मीदवार उतारे थे।
राजद की तरह कांग्रेस भी 2017 में चुनाव के मद्देनजर गैरभाजपा दलो के एकजुट होने की पक्षधर है। कांग्रेस का मानना है कि बिहार में महागठबंधन की वजह से ही भाजपा पराजित हुयी। कांग्रेस ने आगामी 21 नवम्बर को नोएडा में “मिशन 2017” फतह के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलायी है। प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि बैठक में विधानसभा चुनाव पर तो चर्चा होगी लेकिन महागठबंधन के बारे मे फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ही लेंगे। इससे पहले कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और जनता दल यूनाइटेड तथा कुछ अन्य धर्मनिरपेक्ष दलो के गठबंधन करने की सूचनाएं मिल रही थी। इस बीच, सपा महासचिव और उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने हाल ही में वाराणसी में दिये बयान में यहां गठबंधन बनने के संकेत दिये हैं। श्री यादव ने कहा कि साम्प्रदायिक ताकतो को नेस्तनाबूत करने के लिए सपा किसी से भी समझौता कर सकती है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ही करेंगे।
लालू प्रसाद यादव और सपा अध्यक्ष रिश्तेदार हैं। राजद अध्यक्ष की बेटी से मुलायम सिंह यादव के पोते से शादी हुई है। इसलिए उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनने की सम्भावनाएं प्रबल दिखती हैं। दोनों ही मूलरुप से समाजवादी और भाजपा के धुर विरोधी माने जाते हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी बडी राजनीतिक ताकत है। बसपा को शामिल किये बगैर महागठबंधन की सफलता निश्चित नहीं मानी जा सकती, लेकिन गैरभाजपाई दल बसपा अध्यक्ष मायावती को गठबंधन में शामिल होने के लिए मना ले गए तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव एकतरफा हो जाएगा क्योंकि पिछडों और दलित एक मंच पर होंगे। राजनीतिक समीकरण इनके पक्ष में होगा और मुसलमान मतदाता भी गठबंधन को अपना मत दे सकते हैं।

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