पटना, 07 नवम्बर। भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जैसी आषंका थी, वह चुनाव समाप्त होते ही सामने आ गयी। केन्द्र सरकार ने जनता पर बोझ डालने का नया दौर शुरू कर दिया है - रेल-यात्रियों पर भारी बोझ पड़ रहा है, अब जो टिकट लौटाने जाऐंगे, उन्हें लौटाने का दोगुना शुल्क देना होगा। इसके अलावा अब यात्री अपना टिकट चार घंटे पहले ही लौटा सकेंगे, पहले दो घंटा पहले लौटा सकते थे। तीस रुपये से कम का टिकट लौटेगा ही नहीं। रसोई गैस सिलिंडर की भी सबसीडी कम की जा रही है, कुछ मामलों में तो सबसीडी खतम की जा रही है, इसमें गैस सिंलिंडर का दाम बढ़ जाएगा। इतने में मोदी सरकार को संतोष नहीं हुआ, अब वह नौकरी पेषा वालों पर पेष कर या सेवा-कर लगाने वाली है जो 15 नवम्बर से लागू हो जायेगा। पिछले ही साल केन्द्र सरकार ने सेवा-कर को 12 प्रतिषत से बढ़ाकर 14 प्रतिषत कर दिया था। आम जनता पर इस तरह का वित्तीय बोझ लादना सरकार की संवेदनहीनता का परिचायक है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सरकार के इन कदमों का विरोध करेगी।
देष के बड़बोले प्रधानमंत्री आम जनता के लिए यही अच्छे दिन लाने वाले थे, सोचिए, ये अच्छे दिन केन्द्र सरकार और धनाढ्य लोगों के लिए है या जनता के लिए। असल में जिन इजारेदार और व्यावसायिक घरानों से चुनाव में भाजपा ने चंदा लिया और हेलिकाॅप्टर उड़ाया है, उनकी सेवा तो मोदी सरकार को करनी ही है। मोदी उनकी सेवा में लग गये हैं।

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