पटना 06 नवम्बर, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी बेहद करीबी रहे राज्यसभा के पूर्व सदस्य शिवानंद तिवारी ने आज नसीहत देते हुए कहा कि गठबंधन के दोनों दलों में दो के अलावा कोई तीसरा नेता नहीं दिख रहा है इसलिए अतिपिछड़ा, दलित, मुस्लिम और महिला समाज से यदि नेतृत्व नहीं उभारा गया तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत हमेशा उन्हें मदद नहीं पहुंचाएंगे । चुनावी राजनीति से संन्यास ले चुके श्री तिवारी ने यहां कहा कि एग्जिट पोल ने सबका सिर चकरा दिया है । अंतिम नतीजा निकलने तक उहापोह की यह स्थिति बनी रहेगी । बहरहाल चुनाव परिणाम चाहे जो हों, लेकिन एक बात साफ है कि दोनों पक्षों को आत्ममंथन करने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि गठबंधन का आधार वोट काफी बड़ा है बावजूद इसके उहापोह की जो स्थिति बनी है उसे उसके नेताओं को समझना चाहिए । पूर्व सांसद ने कहा कि गठबंधन में दो के अलावा तीसरा नेता नहीं दिख रहा है, इसलिए उन्हें अतिपिछड़ा,दलित,मुस्लिम और महिला समाज से नेतृत्व उभारना होगा अन्यथा भविष्य में उन्हें और ज्यादा कठिनाई होगी । उन्होंने कहा कि गठबंधन के नेताओं को याद रखना चाहिए कि श्री भागवत हमेशा उन्हें मदद नहीं पहुंचाएंगे ।
श्री तिवारी ने कहा कि इस बार का चुनाव देखकर दिया और तूफ़ान की लड़ाई वाले गीत की याद आ गयी । भारत की पूरी सरकार चुनाव लड़ने बिहार में उतर गई थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां अपना सबकुछ दाव पर लगा दिया । बावजूद इसके पांच में तीन एग्जिट पोल बिहार में गठबंधन की सरकार बना रहे हैं । उन्होंने कहा कि स्थिति बता रही है कि श्री मोदी और उनके समर्थकों को भी आत्मचिंतन की ज़रूरत है । पूर्व सांसद ने कहा कि श्री मोदी धूमकेतु की तरह भारतीय राजनीति के क्षितिज पर प्रकट हुए थे लेकिन इतनी जल्दी उनकी चमक क्यों धुंधलाने लगी है, इस पर उन्हें विचार करना चाहिए । उन्होंने कहा कि अभी तक मोदी सरकार का कोई ठोस काम नहीं दिखा है लेकिन धार्मिक उन्माद की उनकी भाषा ने देश में चिंता ज़रूर पैदा कर दी है। उनको ध्यान रखना होगा कि उन्माद किसी भी समाज का स्थाई भाव नहीं होता है। श्री तिवारी ने कहा कि पिछड़ी जातियां , दलित और अकलियत समाज का समर्थन ही महागठबंधन की रीढ़ है। इसलिए गठबंधन के नेताओं पर जात-पात की राजनीति करने का आरोप लगाया जाता रहा है । उन्होंने कहा कि पिछड़ी जाति वाले उनके साथ कैसे रिश्ता बनाएं ,जो आज भी मन ही मन उनको छोटा और अपने को श्रेष्ठ समझते हैं । संबंध बराबरी में बनता है। इसलिए पिछड़े एक तरफ तो अगड़े दूसरी तरफ़ दिख रहे हैं । उन्होंने कहा कि गठबंधन का आधार इतना बड़ा है जिससे उन्हें लगता है कि उसमें थोड़ा-बहुत क्षरण के बावजूद उसे स्पष्ट बहुमत मिल सकता है।

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