नयी दिल्ली, 14 नवम्बर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश में असहिष्णुता के माहौल को लेकर हमला करते हुए आज कहा कि असहिष्णुता के संबंध में वह ब्रिटेन में तो बात कर लेते हैं लेकिन देश की संसद में चुप्पी साधे रहते हैं। श्री गांधी ने आज यहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की 125वीं जयंती वर्ष पर कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘नेहरू स्मरणोत्सव’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि श्री मोदी ने लंदन में कल अपने भाषण में कहा कि भारत में असहिष्णुता का माहौल नहीं है। भारत एक सहिष्णु राष्ट्र है लेकिन यह अजीब बात है कि इस तरह की बात वह देश की संसद में नहीं करते हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि आज देश में असहिष्णुता का माहौल है। हरियाणा में दो मासूमों को जिंदा जलाने की घटना होती है और दादरी में एक समुदाय विशेष के व्यक्ति की पीट पीटकर हत्या की जाती है। यह हिंदुस्तान का कायदा नहीं है। भाईचारे के साथ ही विकास किया जा सकता है और यह काम सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है। भाईचारे का माहौल बिगाडने से फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि देश को मिलकर ही आगे बढ़ाया जा सकता है और पंडित नेहरू इस बात को समझते थे और वह विपक्षी दल के नेताओं का आदर करते थे। उनका मानना था कि विपक्ष को साथ लिए बिना आगे नहीं बढा जा सकता है। यही कारण है कि नेहरू जी के जमाने में जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी संसद में खड़े होकर अपनी बात करते थे तो पंडित नेहरू उनकी बात को ध्यान से सुना करते थे।
श्री गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की संसद में रुचि नहीं है और वह विपक्ष के सवालों पर ध्यान नहीं देते हैं। श्री मोदी के अच्छे दिन के वादे पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के पास सभी सवालों के जवाब होते तो अच्छे दिन भी आ गये होते। ब्रिटेन की यात्रा पर गये श्री मोदी ने कल वेम्बले स्टेडियम में भारतवंशियों को संबोधित करते हुए कहा था कि विविधता में एकता भारत की ताकत है और इसी ताकत के बल पर देश विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने कहा था कि यह विविधता हमारी विशेषता है, हमारी आन, बान, शान है और हमारी शक्ति भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर देश में अपनी विचारधारा थोपने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वह पूरे देश को एक ही रंग में रंगना चाहता है जबकि कांग्रेस पार्टी वास्तव में विविधता में एकता में विश्वास रखती है। कांग्रेस सबको साथ लेकर चलना चाहती है जबकि संघ चाहता है कि सब उसकी विचारधारा का ही अनुसरण करें। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस में सबके लिए जगह है और यहां सबकी बात सुनी जाती है लेकिन उनकी यानी संघ और भाजपा की विचारधारा के लोग चाहते हैं कि सिर्फ उनकी ही बात सुनी जाए। उन्हें यह नहीं समझाया जा सकता है कि सिर्फ एक ही रंग से चित्र तैयार नहीं किया जा सकता है।

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