नयी दिल्ली, 19 नवंबर, सरकार ने छोटे उद्योगों को स्वच्छ, हरित और किफायती ऊर्जा तकनीक उपलब्ध कराने के लिए ‘प्राैद्योगिकी अधिग्रहण एवं विकास कोष’ जारी किया है जिसके तहत सेवा, उपकरण और डिजायन खरीदे जा सकते हैं। एक अधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि इस कोष से सूक्ष्म, लघु एवं मध्य स्तर के उद्याेगों के लिए स्वच्छ, हरित एवं किफायती ऊर्जा तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी। इसका इस्तेमाल छोटे उद्योग डिजायन, विशेष सेवा एवं पेंटेंट खरीदने के लिए भी कर सकते हैं। इस कोष से छोटे उद्योगों को कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 20 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। प्रौद्योगिकी का अधिग्रहण भारत या विदेश में कहीं भी किया जा सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कल ‘प्रौद्योगिकी अधिग्रहण एवं विकास कोष’ छोटे उद्योगों के लिए जारी करते हुए कहा कि इस योजना से छोटे उद्याेगों के विकास का बढ़ावा मिलेगा अौर ये नयी तकनीक अपना सकेंगे। कोष का गठन औद्योगिक नीति एवं विकास विभाग ने राष्ट्रीय विनिर्माण नीति के तहत किया गया है।
कोष का गठन छोटे उद्याेग क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी लाने के लिए किया गया है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वकांक्षी कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना को ग्लोबल इनोवेशन एंड टेक्नोलाॅजी एलायंस के जरिए लागू किया जाएगा। कोष का इस्तेमाल विश्व स्तर पर प्रौद्योगिकी और पेंटेंट हासिल करने के लिए भी किया जा सकता है। इनका लाइसेंस कुछ चयनित कंपनियों को दिया जाएगा और इसका इस्तेमाल साझा तौर पर किया जा सकेगा। चयनित कंपनी को कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 20 लाख रुपए दिए जाएगें। छोटे उद्याेग प्रदूषण नियंत्रक, ऊर्जा खपत घटाने वाले और जल संरक्षण करने वाले उपकरण, मशीन और तकनीक खरीदने के लिए भी कोष से मदद ली जा सकती है। इसके लिए छोटे उद्योगों को कुल लागत का 10 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। राष्ट्रीय निवेश एवं विनिर्माण क्षेत्रों में हरित भवन बनाने, ऊर्जा और जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और नवीनीकरणीय ऊर्जा की परियोजनाओं मेें भी इस कोष का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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