नयी दिल्ली 20 नवम्बर, उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) भर्ती घोटाला मामले में राज्य के राज्यपाल राम नरेश यादव को पद से हटाये जाने की याचिका पर केंद्र सरकार और श्री यादव से आज जवाब-तलब किया। मुख्य न्यायाधीश एच एल दत्तू, न्यायमूर्ति शिवकीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की खंडपीठ ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता संजय शुक्ला की याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और श्री यादव को नोटिस जारी किये। न्यायालय ने इस पर जवाब के लिए सभी संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह का समय दिया। इससे पहले श्री शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस बहुचर्चित घोटाला मामले में श्री यादव की भूमिका संदिग्ध है। याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है कि यदि कोई राज्यपाल भ्रष्ट आचरण के आरोप में संलिप्त पाया जाता है तो उसे पद से हटाने के लिये दिशानिर्देश बनाने का निर्देश गृह मंत्रालय को दिया जाए।
संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिले अधिकार को चुनौती देने वाली दलीलों को भी न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता भ्रष्टाचार के आरोपी राज्यपाल को हटाने के लिए केंद्र सरकार को दिशा निर्देश जारी करने का न्यायालय से अनुरोध किया है। दरसअल, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने वन रक्षक भर्ती घोटाले में राज्यपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। राज्यपाल ने प्राथमिकी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिस पर उसने राज्यपाल के खिलाफ प्राथमिकी रद्द कर दी थी। याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने व्यापम घोटाले की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो को दे रखा है। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद से इस मामले से जुड़े लोगों की मौतों का सिलसिला लगभग समाप्त हो गया है। इस घोटाले में अनेक पेशेवर व्यक्ति, राजनीतिक व्यक्ति और नौकरशाह अभियुक्त हैं।

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