झांसी, 24 दिसम्बर, उत्तर प्रदेश सरकार ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र के समस्त जिलों में अन्ना प्रथा उन्मूलन योजना के तहत अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं के प्रजनन संवर्धन तथा संरक्षण के लिए चैकस व्यवस्था की है। आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता परक सांड़ों की उपलब्धता तथा छुट्टा घूमने वाले साड़ों का वधियाकरण किया जायेगा जिससे कम गुणवत्ता वाले पशुओं के प्रजनन पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि अन्ना प्रथा उन्मूलन योजनान्तर्गत निम्न आनुवांशिक गुणवत्ता के पशु जिनका पालन पोषण पशुपालकों के द्वार पर तथा गौशाला में बाँधकर किया जा रहा है इन पशुओं में नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान की व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। हमीरपुर,महोबा,बांदा, जालौन एवं ललितपुर जिलों में ऐसे प्रजनन योग्य स्वदेशी गोवंशीय मादा पशुओं की कुल संख्या का अनुमानतः 20 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान के लिए लक्ष्य रखा गया है। कृत्रिम गर्भाधान का कार्य विभागीय केन्द्रों पैरा वेट्स एवं बायफ केन्द्रों द्वारा निर्धारित शुल्क पर किया जायेगा।
सूत्रों ने बताया कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से पशुपालकों के द्वार पर तथा स्थापित एवं सक्रिय गौशालाओं में केन्द्रित किया जायेगा जिसके सफल संचालन के लिए शुल्क 80 रूपये प्रति कृत्रिम गर्भाधान रखा गया है। इसमें गुणवत्तायुक्त वीर्य आदि सामग्री पर 40 रूपये प्रति कृत्रिम गर्भाधान व्यय किया जायेगा तथा अवशेष धनराशि 40 रूपये विभीगीय केन्द्रों को लेवी शुल्क तथा पैरा वेट्स एवं बायफ को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रति कृत्रिम गर्भाधान दिया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि गौशाला एवं पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को दृष्टि में रखते हुए कृत्रिम गर्भाधान निर्धारित शुल्क माफ किया जाना अति आवश्यक है जो योजना द्वारा वहन किया जायेगा। इसके अतिरिक्त जो भी व्यय होगा वह पशुपालन विभाग बायफ एवं पैरावेट्स अपने पास उपलब्ध संसाधनों से करेंगें।
सूत्रों ने बताया कि दुधारू पशुओं के लिए बुंन्देलखंड क्षेत्र में पूरे साल हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उच्चगुणवत्तायुक्त मादायें पैदा कर दुग्ध उत्पादकता में बढ़ोत्तरी करना है। उन्होंने बताया कि इसके लिए पशुओं को संतुलित आहार के रूप में हरे चारे की भी आवश्यकता होगी इस के लिए पशुपालकों को ऐसे हरे चारे को बोने के लिए प्रोत्साहित करना है जिसकी उपलब्धता वर्ष भर बनी रहे तथा हरे चारे से पशुओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध हो सके। योजना के तहत पशुपालकों को निःशुल्क चारा बीज किट्स उपलब्ध कराया जायेगा। सूत्रों के अनुसार इस कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न तरीक अपनाये जायेंगे। इनमें गौशाला की खाली भूमि पर चारा उत्पादन के लिए चारा बीज मिनीकिट उपलब्ध कराना पशुपालकों को हरे चारे के लिए चारा बीज मिनीकिट उपलब्ध कराना शामिल होगा। इसके अलावा योजना के तहत चारा बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया जाना आवश्यक होगा जिनका क्रय राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों अथवा मान्यता प्राप्त पंजीकृत फर्मों से किया जायेगा। पशुपालकों को वितरित चारा बीज से क्षेत्र स्तर पर उत्पादित चारे का प्रदर्शन किया जाना भी आवश्यक होगा।

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