नयी दिल्ली, 24 दिसंबर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए आज कहा कि उन्होंने राजनीतिक विमर्श के स्तर को गिराया है। श्री जेटली ने एक लेख में आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के कर्ता-धर्ता और उनके समर्थकों ने राजनीतिक विमर्श के स्तर को गिराया है। वे झूठ फैलाने में विश्वास रखते हैं। दिल्ली में आप की सफलता से कांग्रेस को यह भ्रम हो गया है कि अभद्र भाषा के इस्तेमाल से वोट हासिल किये जा सकते हैं। भारतीय जनता की राय में निष्पक्षता का भाव है और देश में राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरने के खिलाफ उनका आक्रोश जाहिर होना चाहिये। उन्होंने कहा, “क्या अभद्र भाषा का इस्तेमाल भारतीय राजनीति का नया मानक है। मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है। कुछ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी के कुछ सदस्यों ने कुछ ऐसे बयान दिये थे जिनका पार्टी ने समर्थन नहीं किया था। पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें ऐसे बयानों से परहेज करने की सलाह दी थी और उनकी सलाह पर अमल भी हुआ।”
वित्त मंत्री ने सवाल किया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा के अंदर और बाहर प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं के बारे में दिये गये बयानों का क्या। अगर भारत सरकार का कोई अधिकारी ऐसा बयान देता तो इससे पूरे देश में हंगामा मच जाता। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से शालीन व्यवहार की उम्मीद की जाती है। उन्हें अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। राजनीतिक विमर्श अभद्र भाषा में नहीं होना चाहिये। अभद्र भाषा में फैलाया गया झूठ कभी सच की जगह नहीं ले सकता। उच्च स्तर की राजनीति में लंपटबाजी को स्वीकारा नहीं जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि श्री केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) छापेमारी के बाद श्री जेटली आप के निशाने पर है। पार्टी का आरोप है कि सीबीआई ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में घोटाले की फाइल को जब्त करने के लिये छापा मारा था। श्री जेटली ने इस मामले में श्री केजरीवाल और आप के पांच नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया है।

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