अहमदाबाद, 24 दिसंबर, डीडीसीए भ्रष्टाचार प्रकरण को लेकर वित्त मंत्री अरूण जेटली के खिलाफ परोक्ष ढंग से मोर्चा खोलने के कारण भारतीय जनता पार्टी से कल निलंबित किये गये सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने पार्टी से उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों को वापस लेने की मांग करते हुए आज कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पूरा भरोसा है और वह अपने निलंबन के मामले में हस्तक्षेप के लिए उनसे गुहार लगायेंगे और उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के पुत्र कीर्ति , जिन्हे 1983 में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए पहले रात्रि मैच में अपनी आतिशी पारी के जरिये पाकिस्तान के खिलाफ रोमांचक जीत दिलाने के लिए भी याद किया जाता है, ने यहां पत्रकारों से कहा कि वह डीडीसीए में भ्रष्टाचार के मुद्दे को पिछले नौ साल से उठाते रहें हैं और इसको वह कभी भी राजनीतिक मंच पर नहीं लाये।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी अपनी पार्टी के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा अथवा इसके खिलाफ दगाबाजी नहीं की और न ही कभी कांग्रेस अथवा आम आदमी पार्टी के साथ साठगांठ की। उन्होंने केवल डीडीसीए में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने की बात तो भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी करते हैं। मैने इस मुद्दे को उठा कर कुछ भी गलत नहीं किया है। बिहार के दरभंगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री आजाद ने कहा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि मोदीजी मेरी बात सुनेंगे और मुझे न्याय मिलेगा। मै मार्गदर्शक मंडल , जिसके सदस्य अटल जी हैं और स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय रह चुके हैं और जिन्होंने अपने खून पसीने से पार्टी को आगे बढाया है, से भी इस मामले को देखने केे लिए कहूंगा।
आजाद ने कहा कि उन्हें यही पता नहीं है कि उनके खिलाफ कौन सी बात के लिए अनुशासनहीनता के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि मोदीजी इस मामले को गहराई से देखेंगे और मुझे बताया जाएगा कि मेरी गलती क्या है। सीबीआई पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि यह एजेंसी भ्रष्टाचार के मामले में नोटिस देकर परोक्ष ढंग से डीडीसीए की मदद ही कर रही है क्योंकि ऐसे नोटिस के बाद संबंधित फाइलें गायब हो जा रही है। उन्होंने हालांकि डीडीसीए के कथित भ्रष्टाचार के मामले में व्यक्तिगत हैसियत से जनहित याचिका दायर करने और जरूरत पडने पर इस प्रकरण की अदालत की निगरानी में जांच की मांग करने की बात भी कही। अपने निलंबन को लेकर आज नयी दिल्ली में पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में हो रही कथित सुगबुगाहट के बीच श्री आजाद ने यहां पत्रकारों से कहा कि उन्हें निलंबन का जो नोटिस मिला है उसमें कोई सीधे बिंदुओं पर आरोप (स्पेसिफिक) नहीं है। उन्होंने जो भी आरोप लगाये उसमें पार्टी के मंच का कभी भी इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि मै इस मामले में पार्टी को फिर से लिखूंगा।
श्री आजाद ने कहा, ‘मै चाहूंगा कि श्री नरेन्द्र मोदी इस मामले को स्वयं देखें और बतायें कि मेरी गलती क्या है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उनका जवाब तैयार करने में मदद देने की बात कही है। उन्होंने कहा, ‘मैने डीडीसीए और बीसीसीआई के भ्रष्टाचार को कभी भी पार्टी के माध्यम से नहीं उठाया क्योंकि मै यह मानता हूं कि यह राजनीतिक अथवा पार्टी से जुडा मामला नहीं है। मेरी मुहिम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ है।’ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं की पंक्तियां सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार की बात को उठाना और सच बोलना गुनाह है तो वह यह गलती बार बार करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी से उन्हें निलंबन का नोटिस मिला है पर उसमें स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मै जानना चाहता हूं कि मेरी गलती क्या है और मैने कौन सी अनुशासनहीनता की है।’

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