पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग स्थित चाय बागानों के मजदूरों की दीनहीन स्थिति से निबटने के लिए त्वरित प्रयास किये जाने तथा बागान श्रमिक कानून में संशोधन की मांग आज लोकसभा में उठी। भारतीय जनता पार्टी के एस एस अाहलुवालिया ने शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाया, जिसका अन्य दलों के कई सदस्यों ने भी समर्थन किया। श्री आहलुवालिया ने कहा कि दार्जीलिंग के दुआर क्षेत्र के चाय बागानों के मजदूरों की स्थिति दयनीय हैं। न तो उन्हें अन्य राज्यों के चाय बागान के कामगारों के समतुल्य न्यूनतम मजदूरी मिलती है, न ही उनका भविष्य संरक्षित रखने के लिए कोई उपाय किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन चाय बागानों के कामगारों को केवल 112 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है, जबकि राज्य में श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 206 रुपये है। केरल और कर्नाटक के चाय बागानों के मजदूरों की दैनिक मजदूरी 254 रुपये है।
भाजपा सदस्य ने कहा कि चाय बागान के 95 हजार मजदूरों के पास मकान नहीं हैं। इस क्षेत्र के 273 में से 166 बागानों में ही अस्पताल की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं इन अस्पतालों में से 92 अस्पताल ऐसे हैं जहां एमबीबीएस डॉक्टर नहीं हैं। किसी-किसी तरह से इन अस्पतालों को चलाया जा रहा है। उन्होंने बागान श्रम कानून में संशोधन करने की मांग करते हुए श्रमिकों के लिए हर जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित किये जाने की मांग की। उन्होंने इन श्रमिकों के लिए मकान बनाने संबंधी प्रावधान किये जाने की वकालत भी की। इस पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान ले रही है और जल्द ही इस बारे में आवश्यक कदम उठाये जाएंगे।

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