- फ्रैक्चर पैर में डाली एक रॉड और बिल थमा दिया दो रॉड का महंत इन्द्रेश अस्पताल का कारनामा
- मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का अस्पताल उड़ा रहे हैं मज़ाक
देहरादून (राजेन्द्र जोशी ): मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से आच्छादित करने के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना इसलिए सूबे में लागू की ताकि किसी गरीब परिवार के पास यदि ऐसे समय पर धन ना हो जब उसको इलाज़ की जरुरत हो तो वह इस बीमा योजना का लाभ उठा सके. लेकिन कथित रूप से बनायीं गयी राजधानी देहरादून के नामी अस्पताल ही मुख्यमंत्री की इस योजना का मजाक बना रहे हैं साथ ही वे गरीब परिवारों का शोषण भी कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला तब जानकारी में आया जब बीती अक्टूबर माह में उत्तरकाशी के नैताला निवासी कैलाश प्रसाद को पैर टूटने के इलाज के लिए उत्तरकाशी जिला अस्पताल से महंत इन्द्रेश हॉस्पिटल लाया गया. बकौल कैलाश प्रसाद उसके पास मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा कार्ड था इसलिए वह खर्च को लेकर निश्चिन्त था.
देहरादून के नामी गिरामी महंत इन्द्रेश अस्पताल की दस्ता जब उन्होंने सुनाई तो एक बार तो हम भी आश्चर्य चकित हो गए कि क्या सेवा की बात करने वाले कथित अस्पताल भी ऐसा कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर को उनको देहरादून लाया गया और महंत इन्द्रेश अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहाँ तमाम जांच के बाद उनके पैर में दो रॉड डालने की वहां के डॉक्टरों व मेडिकल स्टोर संचालकों ने उनको सलाह दी और बताया कि अपने देश में बनी रॉड की कीमत 18 हज़ार व विदेशी रॉड की कीमत 25 हज़ार है. काफी मोल भाव करने के बाद वहां के डॉक्टरों व मेडिकल स्टोर संचालकों ने देश में निर्मित दो रॉड को 25 हज़ार में देने पर हामी भरी तब जाकर उनके पैर का ओपरेशन किया गया वहीँ ओपरेशन से पहले अस्पताल प्रशासन ने उनसे 10 हज़ार रुपये भी रखवा लिए.
उन्होंने बताया ओपरेशन के बाद जब मेरे एक परिचित डॉक्टर ने पैर का एक्स -रे किया तो पता चला कि पैर में जहाँ महंत इन्द्रेश अस्पताल के डॉक्टरों ने दो रॉड डाले जाने की बात की थी वहीँ उन्होंने केवल एक ही रॉड डाली थी जो कि एक्स-रे में साफ़ दिखाई दे रही थी. कैलाश प्रसाद ने बताया उनके द्वारा जब ओपरेशन करने वाले डॉक्टरों से शिकायत दर्ज की गयी और एक अतिरिक्त रॉड न लगाये जाने की बात कहते हुए साढ़े 12 हज़ार रुपये वापस मांगे तो उन्होंने उनके हाथ 10 हज़ार रुपये का और बिल थमा दिया. ताकि उनसे पैसे वापस न मांग सकूँ. उन्होंने बताया और हुआ भी वही मै गरीब आदमी अब कहां से इनको पैसे लाकर देता. जबकि इससे पहले भी वे 10 हज़ार रुपये ले चुके थे. उन्होंने बताया मामला यहीं नहीं ख़त्म हुआ दो पैरों से सरपट चलने वाले मुझ जैसे व्यक्ति को महंत इन्द्रेश अस्पताल के डॉक्टरों ने विकलांग बना डाला है ओपरेशन के बाद मेरी एक टांग बड़ी व एक छोटी हो गयी है.

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