अभिषेक पुष्पकर्णी के जल से अभिषेक के लिए जुटने लगे हैं सैलानी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 18 अप्रैल 2016

अभिषेक पुष्पकर्णी के जल से अभिषेक के लिए जुटने लगे हैं सैलानी

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हाजीपुर,18 अप्रैल, बिहार के वैशाली में प्रत्येक वर्ष पौराणिक अभिषेक पुष्पकर्णी के जल से होने वाले अभिषेक का महत्व अभी बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष वैशाली महोत्सव के दौरान होने वाले इस जलाभिषेक का लाभ लेने के लिए देश-विदेश के सैलानी एकत्र होते हैं।इतिहासकारों और पुराविदों ने अपनी पुस्तकों में पुष्पकर्णी से जुड़ी पारम्परिक क्रियाकलापों का जिस प्रकार वर्णन किया है उसका निर्वहन वैशाली महोत्सव के अवसर पर प्रत्येक वर्ष किया जाता है। महोत्सव के दौरान पुष्पकर्णी से शोभा यात्रा निकाली जाती है और उस दौरान कलश में पुष्पकर्णी से लिये गये जल से मुख्य अतिथि और विशिष्टजनों पर छिड़काव कर उनका अभिषेक किया जाता है । लिच्छिवयों के शासनकाल में इस पुष्पकर्णी का सबसे अधिक महत्व हुआ करता था ।इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए कड़ी व्यवस्था रहती थी।इसका जल पवित्र रखने के लिए इस पर आवरण बने हुए थे ।इसके पवित्र जल से अभिषेक के बाद ही किसी राजकुमार को वैशाली गणराज्य का लिच्छिवी या महाराजा कहलाने का हक मिलता था ।जाली से ढकी इस पुष्पकर्णी में किसी पक्षी के भी स्नान करने की गुंजाइश नहीं थी । 

एक किवदंती के अनुसार एक पड़ोसी राजा ने रानी की इच्छा अनुसार इस पुष्पकर्णी में स्नान कर लिया और जब इसकी खबर लिच्छिवी राजकुमारों को लगी तो उन्होंने राजा का पीछा कर उसे मार डाला । पुष्पकर्णी के निकट खुदाई में मुगलकाल की मिट्टी की मूर्तियां और ईंट की दीवारें मिली थीं। पांचवी और सातवीं शताब्दी में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान और हेनसान ने भारत यात्रा वृतांत में गणतंत्र वैशाली की महत्ता का वर्णन करते हुए इस अभिषेक कुलकर्णी का भी सारगर्भित उल्लेख किया है। ब्रिटिश पुराविद एलेक्जेडंर कनिंघम ने 1881 में,टीवल्स ने 1893-94 में और डी वी स्पनस्ले ने 1913 में पुष्पकर्णी की खुदाई के बाद इसके महत्व पर प्रकाश डाला था।इन पुराविदों ने इसका समुचित रखरखाव और संरक्षण करने का सुझाव दिया था। 

वैशाली महोत्सव के दौरान श्रीलंका,चीन,जापान,नेपाल म्यांमार,भूटान,थाईलैंड,तिब्बत आदि देशों से सैलानी और बौद्ध तथा जैन धर्मावलंबी पुष्पकर्णी के पारम्परिक क्रियाकलापों को देखने और जलाभिषेक से लाभान्वित होने आते हैं । पुरातन परम्पराओं की गौरवशाली इतिहास की साक्षी इस पुष्पकर्णी के जल से प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद,पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन,पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन,पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा,पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, अभिनेत्री वैजयन्ती माला,अभिनेता सुनील दत्त के अलावा अनेक पूर्व केन्द्रीय मंत्री,पूर्व मुख्यमंत्री ,पूर्व राज्यपाल और इतिहासकार,साहित्यकार तथा पुराविदों का जलाभिषेक किया जा चुका है। तीन दिवसीय वैशाली महोत्सव कल से शुरु हो रहा है।इसके आयोजन के लिए राज्य सरकार की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।देश-विदेश से सैलानी जुटने शुरु हो गये हैं ।

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