नयी दिल्ली, 05 अप्रैल, दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आईएसआई का एजेंट बताये जाने को लेकर खासा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की दिल्ली इकाई ने इसकी कड़ी निंदा करते हुये मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग की है। श्री मिश्रा ने पठानकोट वायु सैनिक अड्डे पर इस जनवरी में आतंकी हमले की जांच के लिये पाकिस्तान से आये संयुक्त जांच दल (जेआईटी) पर सवाल खड़ा करते हुए ट्वीट किया “प्रधानमंत्री के रूप में हमारे यहां क्या यह आईएसआई एजेंट है, प्रधानमंत्री जिस तरीके से भारत विरोधी तत्वों के सामने आत्मसमर्पण कर रहे है, यह एक बहुत गंभीर मामला है।” इससे पहले मुख्यमंत्री ने भी जेआईटी को जांच के लिये भारत आने की अनुमति देने पर सवाल खड़े किये थे। श्री मिश्रा ने ट्वीट में कहा “अगर मोदी जी पाकिस्तान के जाल में फंस गये और उनसे गलती हो गयी तो माफी मांग ले देश से और अगर जानते-बूझते हुए ऐसा किया है तो नीयत पर सवाल उठेंगे। जब से आईएसआई इस देश में बुलायी गयी तब से बहुत गुस्सा आ रहा है और अब आईएसआई की रिपोर्ट से जो देश का अपमान हुआ है उससे खून खौल रहा है।”
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी के बयानों की कड़ी निंदा करते हुये कहा कि इससे देश के संघीय ढांचे का अपमान हुआ है और श्री केजरीवाल को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिये। उन्होंने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास का इस्तेमाल पार्टी के राजनीतिक फायदे के लिये किये जाने की भी आलोचना की। उन्हाेंने कहा कि पठानकोट मसले पर संवाददाता सम्मेलन बुलाने और उनके मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आईएसआई का एजेंट कहने से मुख्यमंत्री ने राष्ट्र और दिल्ली के लोगों को शर्मसार किया है और संघीय ढांचे का उल्लंघन किया है। मुख्यमंत्री के मुख से राष्ट्र विरोधी शब्दों और उनके मंत्री के मुख से गंदी राजनीति भरे शब्द उनकी राजनीतिक मंशा को दर्शाते है। सामान्यत: राज्यों के मुख्यमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा अथवा केन्द्र सरकार के फैसलों पर सार्वजनिक मंचों से नहीं बोलते हैं और संवैधानिक प्रावधानों और परंपरा का पालन करते है ।
श्री उपाध्याय ने कहा “ हम सभी जानते है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी देश के संविधान का सम्मान नहीं करते और राजनीतिक फायदे के लिये अराजक एजेंडा पर चलते है। दिल्ली भाजपा यह अच्छी तरह जानती है कि मुख्यमंत्री अपने अराजक एजेंडा से पीछे नहीं हटेंगे लेकिन हम उन्हें चेता देना चाहते है कि वह सार्वजनिक धन का दुरूपयोग अपनी गंदी राजनीति के लिये नहीं करें। वह निंदा करने के लिये स्वतंत्र है लेकिन उसे अपनी पार्टी के मंच से उठाना चाहिये । इससे पहले दिल्ली में मदन लाल खुराना, डा. साहिब सिंह वर्मा, सुश्री सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित जैसी जानीमानी राजनीतिक हस्तियों ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है और सरकारी निवास का अपने राजनीतिक एजेंडा के लिये कभी इस्तेमाल नहीं किया। आम तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री सरकारी निवास का इस्तेमाल केवल राजधानी से जुड़े मुद्दों के लिये ही करते है।

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