इ कम्मेर्स में एफडीआई का जोरदार विरोध करेंगे व्यापारी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 4 अप्रैल 2016

इ कम्मेर्स में एफडीआई का जोरदार विरोध करेंगे व्यापारी

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कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के तत्वाधान में आज नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में तीन दिवसीय राष्ट्रीय व्यापारी महाधिवेशन शुरू हुआ जिसमें सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करते हुए देश भर के व्यापारी नेताओं ने कहा की इ कॉमर्स में एफडीआई हमको कतई स्वीकार नहीं है और पूरे देश में इसका डटकर विरोध किया जायेगा ! व्यापारी को अनाथ समझने की भूल कोई न करे क्योंकि व्यापारी अपने हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करना जानता है ! महाधिवेशन में देश भर के लगभग 10 हजार व्यापारी नेता भाग लें रहे हैं जिसकी अध्यक्षता कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भर्तियां ने की ! महाधिवेशन में शामिल व्यापारी नेताओं ने कहा की इ कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति देने से असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा और सरकार की जो नीति है उसमें अनेक खामियां है जिसका फायदा उठा कर इ कॉमर्स कम्पनियां भारत के रिटेल बाजार पर अपना कब्ज़ा करेंगी और व्यापारियों को अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ेगा !

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खण्डेलवाल ने कहा की इ कॉमर्स में एफडीआई व्यापारियों के लिए लाभदायक नहीं है क्योंकि विदेशी निवेश या तो प्राइवेट इक्विटी अथवा वेंचर कैपिटल से आता है जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता और यदि वो विदेशी पैसा है तो पश्चिमी देशों में ब्याज की दर 0 .75 % से 3 % है जबकि भारत में बैंक से ब्याज की दर काम से काम 12 % है , ऐसे में केवल ब्याज की दर में इतने बड़े अंतर से  ही इ कॉमर्स कम्पनियां रिटेल व्यापर पर अपना कब्ज़ा जमा लेंगी ! गत वर्षों में इ कॉमर्स कम्पनियों ने डिस्काउंट का जो खेल खेल वो एफडीआई के नियमों के विरूद्ध था और सरकार ने कोई भी करवाई उन कम्पनियों के खिलाफ नहीं की ! इ कॉमर्स में हाल ही जारी अनुमति में जो शर्तें सरकार ने लगाई है वो सब खोखली है जिनमें सेंध लगाकर इ कॉमर्स कम्पनियां अपना व्यापार करेंगी ! नीति में ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं है जिसके अंतर्गत उल्लंघन करने पर कम्पनियों के खिलाफ करवाई हो ! महाधिवेशन में शामिल व्यापारियों ने कहा की वो इ कॉमर्स के खिलाफ नहीं है बल्कि इ कॉमर्स में एफडीआई के खिलाफ हैं और सरकार को चाहिए की वो घरेलु व्यापार को इ कॉमर्स में आने के लिए प्रेरित करे और व्यापारियों से बातचीत कर नीति बांयी जाए !

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