पटना,08 अप्रैल, जिसका कोई नहीं उसका खुदा होता है..कहावत को पिछले 30 वर्षों से असहाय और लावारिस मरीजों की सेवा करके चरितार्थ करते आ रहे गुरमीत सिंह के पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है जिससे उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया है। सरदार गुरमीत पिछले 30 वर्षों से पीएमसीएच में भर्ती असहाय और लावारिस मरीजों के लिये किसी फरिश्ते से कम नहीं थे । ऐसे मरीजों से वह प्रतिदिन अस्पताल में भेंट कर जहां उनकी हौसला आफजायी करते थे वहीं उन्हें बीमारी से लड़ने के लिये भी प्रेरित किया करते थे । इससे उन मरीजों में नया उत्साह जगता था ।
गुरमीत ऐसे मरीजों के लिये प्रतिदिन शाम ढलने के बाद थैले में भरकर टिफिन लाते और अपने हाथों से उन्हें खिलाते थे । बगैर किसी हिचक के वह मरीजों का हालचाल पूछते और उनके खाये हुए बर्तन को साफ करके ले जाते । यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चलता आ रहा था। व्यवसायी गुरमीत असहाय मरीजों के लिये अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनके खाने पर खर्च करते थे । इसके साथ ही उन्होंने 50 से अधिक बार रक्त दान कर कई जरूरतमंदों की जिंदगियां बचायीं । इस काम में उनके परिवार के लोगों का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिलता था ।
अस्पताल में तय समय पर गुरमीत प्रतिदिन ऐसे मरीजों के लिये टिफिन लेकर पहुंचते तो अपने मसीहा के आने की आहट सुनकर ही कई मरीज चैतन्य हो जाया करते थे । गुरमीत ऐसे मरीजों से इस तरह से हिलमिल जाते थे कि वह अपने परिवार को भी भूल जाया करते थे। अस्पताल प्रशासन की कथित कुव्यवस्था की पोल खुलने से आशंकित होकर इस मसीहा के अस्पताल में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है जिससे गुरमीत बहुत बेचैन हैं। ऐसा लगता है कि ऐसे मरीजों में ही गुरमीत के प्राण बसते हैं तभी तो अस्पताल में जाने पर रोक लगा देने से उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया है।

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