नयी दिल्ली 18 अप्रैल, केंद्र सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय में कहा कि भारत कोहिनूर पर अपना दावा नहीं कर सकता, क्योंकि ब्रितानी हुकूमत ने न तो इस पर जबरदस्ती कब्जा किया था और न ही इसे चुराया था। गैर-सरकारी संगठन ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस फ्रंट की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान संस्कृति मंत्रालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि महाराजा रंजीत सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी को कोहिनूर दिया था। श्री कुमार ने मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि ब्रितानी हुकूमत ने न तो कोहिनूर को चुराया था, न ही वह इसे जबरदस्ती ले गई थी। ऐसी स्थिति में भारत सरकार कोहिनूर लौटाने का दावा नहीं कर सकती। हालांकि इस मामले के एक अन्य प्रतिवादी ‘विदेश मंत्रालय’ ने अपना पक्ष अभी नहीं रखा है।
हालांकि न्यायालय ने केंद्र सरकार को आगाह किया कि इस तरह की दलील से केंद्र सरकार को भविष्य में कोहिनूर पर दावा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या वह इस याचिका को खारिज कराने के पक्ष में है? न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि यदि ऐसा है तो भविष्य में इस तरह के दावे में सरकार को मुश्किलें आ सकती हैं। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘मैंने जो कुछ कहा है कि वह संस्कृति मंत्रालय का पक्ष है। इस मामले में विदेश मंत्रालय का पक्ष अभी आना बाकी है।’’ इसके बाद न्यायालय ने केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने इस मामले में संस्कृति और विदेश मंत्रालयों के अलावा ब्रिटेन, पाकिस्तान और बंगलादेश के उच्चायुक्तों को भी पक्षकार बनाया है। याचिका में कोहिनूर के अलावा टीपू सुल्तान की तलवार और अंगूठी के साथ ही बहादुरशाह जफर, झांसी की रानी, नवाब मीर अहमद अली बांदा से संबंधित सामग्रियां वापस लेने के प्रयास करने का भी अनुरोध किया गया है।

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