वाशिंगटन, 02 अप्रैल, भारत ने अपने एयरबेस पर घातक हमले के बाद जैश ए मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर का नाम आतंकवादियों की संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल करने के भारत के प्रस्ताव पर चीन के वीटो अधिकार के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया है और उसके साथ अपनी आपत्ति दर्ज की है। भारत की मांग थी कि अल कायदा इस्लामिक स्टेट तथा अन्य आतंकवादी संगठनों के विरूद्ध प्रतिबंध की निगरानी करने वाली सुरक्षा परिषद जैश ए मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर का नाम आतंकवादियों की सूची में शामिल करें। सुरक्षा परिषद जैश ए मुहम्मद को पहले ही काली सूची में शामिल कर चुकी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि मसूद अजहर का नाम आतंकवादियों की सूची में शामिल नहीं करने का यह अर्थ है कि आतंकवाद का सामना करने के मामले में चयनित रूख अपनाया जा रहा है। विकास स्वरूप वाशिंगटन में परमाणु सुरक्षा सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे।
भारत ने दो जनवरी को पाकिस्तान की सीमा के निकट अपने पठानकोट एयरबेस पर हमले के बाद मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में शामिल करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इस हमले से साफ है कि भारत आतंकवाद का सामना कर रहा है और मसूद अजहर का नाम आतंकवादियों की सूची में शामिल नहीं किया जाना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। एक भारतीय राजनयिक ने कहा है कि चीन ने मसूद अजहर मामले में अपने वीटो अधिकार का उपयोग करने के लिये तकनीकी आधार का सहारा लिया है। प्रतिबंध समिति में सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य शामिल है जो आतंकवादियों की काली सूची में किसी आतंकवादी का नाम शामिल करने का फैसला करते है। चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो अधिकार है। वह लम्बे समय से पाकिस्तान का साथ दे रहा है। चीन के राजदूत ने कहा है कि मसूद अजहर का नाम सूची में शामिल करने के लिये आवश्यक आधार पूरा नहीं होता।

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