मधुमेह की रोकथाम के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

मधुमेह की रोकथाम के लिए सम्मिलित प्रयास की जरूरत

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पटना, 07 अप्रैल, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने देश में मधुमेह के मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि पर चिंता जाहिर करते हुए बीमारी की रोकथाम के लिए सम्मिलित प्रयास करने की ज़रूरत पर बल दिया है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर डब्ल्यूएचओ , बिहार सरकार एवं सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं पटना चिकिस्ता महाविद्यालय के सहयोग से एक विमर्श का आयोजन किया गया जिसमें मधुमेह की रोकथाम और इलाज को लेकर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। विमर्श में इस बात पर जोर दिया गया कि आज डायबीटीज़ की रोकथाम के लिए विभिन्न क्षेत्रों के सम्मिलित प्रयास करने की ज़रूरत है। 

कार्यक्रम का उद्घाटन के बाद राज्य के स्वास्थ्य सचिव सह राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी के कार्यपालक निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में कैंसर, मधुमेह, स्ट्रोक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) का प्रभावी क्रियान्वयन करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कार्यक्रम राज्य के 24 जिलों में कार्यान्वित किया जा रहा है और निकट भविष्य में इसे शेष जि़लों में विस्तारित किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में असमय मृत्यु के सबसे प्रमुख कारणों में हाई ब्लड प्रेशर और तम्बाकू के सेवन के बाद तीसरा नाम ‘हाई ब्लड ग्लूकोज’ का ही आता है। पूरी दुनिया में मधुमेह के 422 मिलियन (20-79 वर्ष उम्र के 8.5 प्रतिशत लोग) मामले हैं। वर्ष 2015 में भारत के अनुमानतः 7.8 प्रतिशत वयस्क मधुमेह के मरीज थे। 

इस विमर्श में डा. एन. आर. विश्वास, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) निदेशक डा. एस. एन. सिन्हा, पटना मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डा. रश्मि सिंह, पटना मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डा. अरुण कुमार, डब्ल्यूएचओ और चिकित्सा महाविद्यालयों से संकाय सदस्य, राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी, विकास एजेंसियों और मीडिया से जुडे़ कई प्रतिनिधि शामिल हुये। 

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