विशेष : बिहार में कितनी सफल होगी 'शराब' पर पाबंदी ? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 2 अप्रैल 2016

विशेष : बिहार में कितनी सफल होगी 'शराब' पर पाबंदी ?

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शराबबंदी के साथ ही अन्य राज्यों के लोगों की नजर में वह राज्य जहां शराब पर प्रतिबंध लगाया गया है कितना ऊंचा स्थान प्राप्त कर लेता है न। कोने कोने में फुसफुसाहट के साथ लंबी चर्चा का दौर शुरू होता है कि फलां सरकार देखो कितनी अच्छी है शराब बंद करा दिया। भला ऐसा कोई कर सकता है। मतलब कि जिस चीज से सबसे ज्यादा रेवेन्यू आता हो उसी पर रोक लगा देना। भई बड़ा अच्छा फैसला है। दरअसल हम इस बात का जिक्र आज इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज से बिहार में शराब पर कई किस्म के प्रतिबंध लागू हो गए। हालांकि लोगों को ये फैसला मूर्ख दिवस पर मूर्ख बनाने के पैंतरे के इतर कुछ भी नहीं नजर आ रहा। बहरहाल आईये नजर डालते हैं गुजरात पर, जहां अलग राज्य बनने के साथ ही शराब प्रतिबंधित है। साथ ही ये भी जानने की कोशिश करते हैं कि बिहार में शराब के प्रतिबंधित होने के साथ नये नियम कायदे एवं नुकसान का आंकलन कितना है। 

1. 1960 से जब महाराष्ट्र से अलग करके गुजरात का नया सूबा बनाया गया सूबे में शराबबंदी लागू है।

2. हालांकि कुछ लोग इस प्रतिबंध को महज कागजों पर ही मानते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों में वहां 2500 करोड़ रुपए की अवैध शराब ज़ब्त हुई।

3. अवैध शराब की बिक्री से कई लोग इस क़दर परेशान हैं कि उत्तर गुजरात में एक समुदाय ने ग़ैरक़ानूनी शराब के ठेकों पर जनता ने छापेमारी शुरू कर दी। पिछले चार महीने में इस तरह के छापे 800 जगहों पर मारे गए।

4. गुजरात में ग़ैरक़ानूनी ढंग से शराब पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दीव और दमन से आती है।

5. स्वास्थ्य कारण बताकर सूबे में शराब पीने का परमिट मिल सकता है, जिसे हेल्थ परमिट कहते हैं। राज्य की छह करोड़ की आबादी में से 55,000 के पास ऐसा हेल्थ परमिट है। पूरे राज्य में शराब की बिक्री करने वाली सिर्फ़ 60 दुकानें हैं।

अब यदि शराब पाबंदी से होने वाले टैक्स की भरपाई की बात की जाए तो केंद्र सरकार सूबे को प्रति वर्ष 1200 करोड़ रूपये देता है। ये राशि अलग राज्य बनने के साथ ही सूबे को अब तक मिल रही है। हालांकि कुछ इसी तर्ज पर यदि बिहार और शराबबंदी पर गौर किया जाए तो आंकड़े कुछ इस तरह से होंगे। 

1. बिहार में शराबंदी अप्रैल 2016 से लागू हुई है। 

2. शहरी क्षेत्रों की गर बात की जाए तो यहां पर अंग्रेजी शराब बिकेगी जबकि देसी शराब को पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

3. शराब बंदी  के कारण 2000 करोड़ से अधिक उत्पाद शुल्क के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। 

4. यदि तस्करी की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश और झारखंड का नाम प्रमुख है, जहां से बिहार में शराब की अवैध रूप से तस्करी की जा सकती है। 



---हिमांशु तिवारी "आत्मीय"---

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