उपराष्ट्रपति ने धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावादी संस्कृति की स्पष्ट व्याख्या को कहा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 2 अप्रैल 2016

उपराष्ट्रपति ने धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावादी संस्कृति की स्पष्ट व्याख्या को कहा

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जम्मू 02 अप्रैल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आज कहा कि भारतीय समाज के बहुलतावादी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को ध्यान में रखकर संविधान में धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की नींव रखी गयी थी और उसमें अलग -अलग पहचानों को मिटाकर सबको एकरूप करने का कोई जिक्र नहीं है । डा अंसारी ने यहां जोरावर सिंह सभागार में जम्मू विश्वविद्यालय के 16वें दीक्षान्त समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि देश की सवा अरब से भी ज्यादा आबादी में 4635 समुदाय हैं जिनमें से 78 प्रतिशत समुदायों की न सिर्फ भाषाई एवं सांस्कृतिक बल्कि सामाजिक श्रेणियां हैं । कुल समुदायों में 19़ 4 प्रतिशत धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। डा अंसारी ने कहा कि बोम्मई मामले में धर्म निरपेक्षता और बहुलतावादी संस्कृति पर उच्चतम न्यायालय का सुस्पष्ट फैसला आ चुका है लेकिन विभिन्न विचारधाराओं वाले राजनीतिक दल अपने -अपने हिसाब से इसकी अलग -अलग व्याख्या करते हैं लिहाजा इसमें अस्पष्टता आ गयी है । 

उपराष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह अपने विवेक के अनुसार इन दोनों की स्पष्ट व्याख्या करे ताकि इस पर अस्पष्टता दूर हो सके और इसे अमल में लाने के तौर -तरीकाें को मजबूत किया जा सके । डा अंसारी ने धर्मनिरपक्षेता पर बोम्मई मामले पर अदालत के निर्णय को उद्धृत करते हुए कहा कि संविधान में राज्य को किसी धर्म विशेष को राज्य के धर्म के रूप में प्रश्रय देने पर रोक है 1 अलबत्ता उसे तटस्थता बरतने को कहा गया है । राष्ट्रीय एकता के लिए धार्मिक सहिष्णुता और भाईचारे को मुख्य तत्व माना गया । राजनीतिक दलों की ओर से धर्म के आधार पर कार्यक्रम तैयार करने पर रोक लगायी गयी है ।

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