बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने का फैसला ऐतिहासिक : राज्यपाल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 3 अप्रैल 2016

बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने का फैसला ऐतिहासिक : राज्यपाल

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हाजीपुर (बिहार) 03 अप्रैल, बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने एक अप्रैल से प्रदेश में शराबबंदी लागू करने के राज्य सरकार के फैसले काे ऐतिहािसक बताते हुए इसके अनुपालन में जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से सार्थक सहयोग देने की अपील की । श्री कोविंद ने आज यहां इंडोर स्टेडियम में चतुर्थ राष्ट्रीय मानवाधिकार सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि शराबबंदी कानून के अनुपालन के लिए संसद से पंचायत स्तर तक संकल्प लेने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि बिहार को शराब मुक्त प्रदेश बनाने का सरकार का निर्णय का सकारात्मक संदेश बाहर के राज्यों में गया है। राज्यपाल ने कहा कि मानवाधिकार मानव के अस्तित्व से जुड़ा है ,जिसकी प्राप्ति लोगों में जन जागरुकता लाकर किया जा सकता है। मानवीय संवेदना ही मानवाधिकार का आधार है। उन्होंने कहा कि लोगों में या समाज के बीच अधिकारों को लेकर होने वाले टकराहट का मूल कारण स्वार्थसिद्धी रहा है और उसे दूर करने का काम शांति , सद्भाव एवं आपसी भाईचारे से किया जा सकता है। 

इस मौके पर प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा कि संविधान में प्राप्त कानूनी अधिकार के बावजूद दलित , पिछड़ों तथा सामाजिक न्याय एवं समानता के लिए आज भी समाज में संघर्ष व्याप्त है । उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसे मामलों को लेकर मानवाधिकारों का उल्लंघन होता रहा है। डा. मिश्र ने कहा कि सत्ता प्राप्ति के लिए राजनीतिक दल और उनके जनप्रतिनिधि दलितों ,पिछड़ों , सामाजिक न्याय एवं समता के बुनियादी अधिकारों का वादा कर चुनाव जीतते रहे हैं , लेकिन उनके वादे चुनाव जीतने के बाद वादा बनकर रह जाता है। डा. मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि .. सबका विकास सबका साथ.. का उनका संकल्प और कार्यों से देश- दुनियां में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है। भारत को एक नया स्वरुप प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से परिवर्तन लाने का काम किया जा रहा है। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1990 के बाद से बिहार में एक हजार दलित सामूहिक नरसंहार में मारे गये , लेकिन इस मामले में अभियुक्तों को सजा नहीं मिली । उन्होंने कहा कि ढ़ाई करोड़ बच्चों का स्कूलों में नामांकन होता है लेकिन 35 लाख बच्चे ही स्कूलों में पढ़ाई करते हैं । डा. मिश्र ने कहा कि बिहार ही नहीं उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल , दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में भी समतामूलक समाज , सामाजिक न्याय से लोग बंचित है तथा दलितों और पीड़ितों को मानवाधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार के प्रति जागरुकता और संवेदनशीलता की शक्ति में ही मानवाधिकार से वंचित लोगों का अधिकार छिपा हुआ है। समारोह को वैशाली जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सह पूर्व जिला न्यायाधीश बी.के़.शर्मा , राज्य के पूर्व मुख्य सचिव वी.एस.दुबे , भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी आर.यू. सिंह के अलावा कई लोगों ने संबोधित किया । प्रतिष्ठान के प्रधान सचिव सुधीर कुमार शुकला ने सम्मेलन का संचालन किया । 

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