दरभंगा 25 अप्रैल, प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. प्रेम मोहन मिश्रा ने नैनो विज्ञान को भविष्य का विज्ञान बताया और कहा कि 21वीं शताब्दी नैनो प्रौद्योगिकी की होगी। सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च इन नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के कोर कमिटी की उच्च स्तरीय बैठक अमेरिका से आये डॉ उपेन्द्र लाल कर्ण एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के विशिष्ठ वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा के साथ स्नातकोत्तर रसायन शास्त्र विभाग में आज एक बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो उत्तिम लाल ठाकुर ने की। बैठक में श्री मिश्रा ने नैनो विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान शताब्दी नैनो प्रौद्योगिकी की होगी । दुनिया के साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलने के लिए हमें इस विधा में शोध कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए।उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा अमेरिका के विश्वविद्यालयों के साथ गठजोड़ के लिए कुलपति द्वारा किये जा रहे प्रयासों की विस्तार से चर्चा की।
अमेरिका से विशेष तौर पर आमंत्रित मुख्य अतिथि डॉ उपेन्द्र लाल कर्ण ने विश्वविद्यालय और अमेरिका के विभिन्न संस्थानों के साथ गठजोड़ के विभिन्न पहलुओं एवं उसकी तैयारियों की सविस्तार चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता से पहले आपको अपनी महत्ता एवं क्षमता साबित करनी चाहिए। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के विशिष्ठ वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा ने कहा कि नैनो तकनीक के क्षेत्र में महती संभावनाएँ हैं, विश्वविद्यालय के शिक्षको को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा नैनो अनुसंधान केंद्र स्थापित करने के प्रयास को इस क्षेत्र के लिए महान उपलब्धि बताते हुए शिक्षकों से आग्रह किया कि एक संयुक्त फोरम बना कर इस क्षेत्र में शोध को आगे बढ़ाएं। साथ ही उन्होंने स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाये जाने की आवश्यकता बतायी।

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