ताड़ी प्रतिबंध के विरोध में 20 जून से लोजपा का चरणबद्ध आंदोलन : पासवान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 25 अप्रैल 2016

ताड़ी प्रतिबंध के विरोध में 20 जून से लोजपा का चरणबद्ध आंदोलन : पासवान

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पटना 25 अप्रैल, केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी(लोजपा) के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन सरकार के ताड़ी पर अघोषित प्रतिबंध को पासी समाज के पेट में चाकू घोपने के समान बताया और कहा कि यदि समय रहते ताड़ी पर से रोक नहीं समाप्त किया गया तो पार्टी 20 जून से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी । श्री पासवान ने आज यहां भीषण गर्मी के बीच अखिल भारतीय पासी समाज की बिहार इकाई की ओर से आयोजित धरना को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश सरकार ने ताड़ी पर रोक लगाकर इस कारोबार से जुड़े पासी समाज के पेट में चाकू घोपने का काम किया है । राज्य सरकार की इस नीति के कारण लाखों लोगों के समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है । केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ताड़ का पेड़ सभी लोगों के यहां होता है ।दूसरे के घरों में लगे हुए ताड़ के पेड़ पर चढकर पासी समाज के लोग रस निकाल कर बेचते है जिससे उनका गुजर -बसर होता है । उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मागांधी ने ताड़ी को नीरा की संज्ञा दी थी । उन्होंने कहा कि सुबह के समय ताड़ी का सेवन करना स्वास्थ्य के लिये हर दृष्टिकोण से लाभदायक होता है । 

श्री पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार ने पहले दस वर्षो तक प्रदेश के गांव-गांव में शराब की दुकान खुलवा दी और अब पूरे देश में शराबबंदी करने की बात कह रहे है । उत्तर और दक्षिण भारत में अंगूर तथा सेव से शराब तैयार किया जाता है ।उन्होंने कहा कि अंगूर और सेव की खेती करने वाले बड़े लोग होते है इसिलये पूरे देश में शराबबंदी की बात करने वाले श्री कुमार इसकी खेती पर रोक नहीं लगा सकते । केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि श्री कुमार ने पहले दलित को महादलित बनाकर बांटने का काम किया और फिर महादलित से पासवान को अलग कर दिया गया । इसी तरह श्री कुमार ने दलित परिवार से आने वाले श्री जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया । श्री पासवान ने कहा कि ताड़ी पर रोक लगाये जाने से कुम्हार समाज के लोगों के पेट पर भी इसका भारी असर पड़ा है । ताड़ के पेड़ से रस(ताड़ी) उतारने के लिये पासी लोग लबनी (मिट्टी का घड़ा) लगाया करते थे और अब रोक लगाये जाने के बाद लबनी का व्यवसाय ही समाप्त हो गया है । कुम्हार समाज के लोग सरकार के इस निर्णय से काफी नाराज है । केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ताड़ी पर रोक लगाये जाने से पासी समाज के साथ ही कुम्हार समाज का भी व्यवसाय छीन गया है । पासी और कुम्हार समाज के लोग रोजी-रोटी के लिये इस व्यवसाय के आलवा कोई दूसरा धंधा नही करते है । उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इस पर प्रतिबंध ही लगाना था तो इस समाज के लोगों के लिये वैकल्पिक व्यवस्था करने बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए था । 

श्री पासवान ने कहा कि महागठबंधन के घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में ताड़ी को कर मुक्त किया गया था । मुख्यमंत्री श्री कुमार के ताड़ी पर रोक लगाये जाने के बाद भी बड़ा घटक दल होने के बावजूद श्री यादव इस पर चुप्पी साधे हुए है । उन्होंने कहा कि श्री यादव को इस पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए क्योंकि यह गरीबों के हित से जुड़ा हुआ मामला है 1 केन्द्रीय मंत्री ने महागठबंधन की सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अविलम्ब ताड़ी पर से रोक नहीं हटाया गया तो राज्य के सभी पंचायतों में पासी के समाज के लोग 20 जून को धरना और प्रदर्शन करेंगे । इसके एक माह के बाद पटना के एतिहासिक गांधी मैदान में पासी और कुम्हार समाज के लोगों से पाट दिया जायेगा । उन्होंने कहा कि इसके बाद बिहार की महागठबंधन सरकार रहने वाली नहीं है । इससे पूर्व अखिल भारतीय पासी समाज की बिहार इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार चौधरी ने केन्द्रीय मंत्री को अपनी मांगों के समर्थन में 14 सूत्री ज्ञापन सौंपा । ज्ञापन में पश्चिम बंगाल , ओड़ीसा , तामिलनाडु और करेल समेत कई राज्यों में ताड़ी के रस से गुड़ ,मिष्टान एवं अन्य खाद्य पदार्थ का निर्माण किया जाता है और इसी तरह बिहार में भी उद्योग लगाकर इस धंधे को विकसित करने की मांग की गयी । साथ ही ताड़ी व्यवसाय को कृषि का दर्जा दिये जाने की मांग की गयी है । ज्ञापन में कहा गया है कि ताड़ी व्यवसाय पासी समाज का पुस्तैनी पेशा है । जिस तरह से यादवों का दूध व्यवसाय ,किसानों का खेती और मल्लाहों का मछली पालन है ठीक उसी तरह से पासी समाज का ताड़ी व्यवसाय है । इस व्यवसाय को समाप्त नहीं करना चाहिए क्योंकि राज्य में 20 लाख पासी समाज के लोग इससे प्रभावित होंगे । 

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