सेना कैंटिन में शराब बिक्री की अनुमति पर सुशील मोदी ने उठाये सवाल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 6 अप्रैल 2016

सेना कैंटिन में शराब बिक्री की अनुमति पर सुशील मोदी ने उठाये सवाल

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पटना 06 अप्रैल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पूरे बिहार में शराबबंदी के बाद सेना के कैंटिन में शराब बिक्री की अनुमति देने के सरकार के फैसले पर सवाल खड़ा किया है । श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष के दबाव में राज्य सरकार को आंशिक शराबबंदी से पीछे हटते हुए पूर्ण शराबबंदी लागू करना पड़ा है । उन्होंने कहा कि जब जनहित में पूरे राज्य में किसी भी तरह की शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है तो फिर आर्मी कैन्टोंमेंट में शराब बिक्री की अनुमति देने का क्या औचित्य है । भाजपा नेता ने सवाल किया कि सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि कैन्टोंमेंट के जरिए बिकने वाली शराब बाहर नहीं आयेगी । क्या पहुंच और रसूख वाले कैन्टोंमेंट से शराब हासिल नहीं कर लेंगे । उन्होंने कहा कि सरकार बताये कि ऐसे में पूर्ण शराबबंदी के अभियान को वह कैसे सफल बनायेगी । श्री मोदी ने कहा कि पहली अप्रैल 2015 से पाउच में देसी शराब की बिक्री पर रोक लगा कर उसकी बोटलिंग के लिए राज्य सरकार ने दर्जनों कम्पनियों को अनुमति दी। कम्पनियों ने बैंकों और अन्य स्रोतों से भारी भरकम कर्ज लेकर 10 से 12 करोड़ की लागत से बोटलिंग प्लांट लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुदान देने के साथ ही उन्हें पांच वर्षों के लिए लाइसेंस निर्गत की लेकिन पूर्ण शराबबंदी के बाद अब बोटलिंग की जरूरत नहीं रही । ऐसे में सरकार की नीति के तहत प्लांट लगाने वालों को कर्ज चुकाने के लिए सरकार को क्षतिपूर्ति देनी चाहिए। 

भाजपा नेता ने कहा कि इसके साथ ही हाल ही में बार एवं रेस्टूरेंट में वर्ष 2016-17 के लिए शराब परोसने का लाइसेंस निर्गत कर सरकार ने शुल्क के तौर पर लाखों रुपये की वसूली की है। जब पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई है तो सरकार को अविलम्ब लाइसेंस शुल्क के तौर पर ली गई राशि को वापस करना चाहिए। दूसरी ओर बिहार में चावल उद्योग के बाद सबसे ज्यादा निवेश डिस्टिलरी और बीयर निर्माण के क्षेत्र में हुआ । सरकार के प्रोत्साहन और आश्वासन के बाद अनेक लोगों ने मक्का, चावल एवं अन्य अनाजों से स्प्रीट और बीयर बनाने की फैक्ट्री लगाई। श्री मोदी ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी के बाद स्प्रीट और बीयर की खपत बिहार में नहीं होगी, ऐसे में उन्हें बाहर निर्यात करना होगा। सरकार की अनुमति से ही डिस्टिलरी और बीयर उद्योग लगे थे जिन्हें सरकार सबसिडी भी दे रही थी। उन्होंने कहा कि इस उद्योग को बचाने के लिए सरकार को स्प्रीट पर लगने वाले निर्यात शुल्क को सुसंगत बनाने पर भी अविलम्ब विचार करना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी के बाद देसी शराब की पेट बोटलिंग प्लांट लगाए दर्जनों कम्पनियों और मक्का, चावल तथा अन्य अनाजों से स्प्रीट और बीयर बनाने वाली फैक्ट्रियों के समक्ष बंदी का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को देसी शराब की बोटलिंग करने वाली कम्पनियों को जहां क्षतिपूर्ति वहीं अनाजों से बनी स्प्रीट व बीयर की अन्य राज्यों में बिक्री के लिए निर्यात शुल्क में राहत देनी चाहिए। इस बीच सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि भाजपा नेता सुशील मोदी द्वेष की राजनीति में संघीय ढ़ांचे की व्यवस्था को भी भूल गये हैं । उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि सेना का कैंटिन राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं है । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जिस तरह से लोकप्रियता बढ़ रही है उसे भाजपा के लोग पचा नहीं पा रहे हैं । 

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