मास्को, 18 अप्रैल, भारत ने पठानकोट हमले के गुनाहगार जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अज़हर को प्रतिबंधित करने के मुद्दे पर चीन से आज दो टूक बात की और चीन भविष्य में इस मुद्दे पर भारत के संपर्क में रहने को तैयार हो गया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां रूस-भारत-चीन (आरआईसी) की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान आतंकवाद पर सहयोग सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। भारत एवं चीन के विदेश मंत्रियों की मुलाकात ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के रक्षा मंत्री बीजिंग में मुलाकात कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया कि श्रीमती स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 समिति द्वारा मसूद अज़हर को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर चीन के वीटो का मुद्दा उठाया और भारत की आपत्ति को बहुत स्पष्टता से सामने रखा।
उन्होंने कहा कि भारत एवं चीन दोनों ही देश आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिये दोनों को आपस में सहयोग करना चाहिये। प्रवक्ता के अनुसार बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इस विषय पर दोनों देश आगे से एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे। प्रवक्ता ने बताया कि दोनों मंत्रियाें ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की तथा पिछले साल मई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चीन यात्रा के दौरान लिये गये निर्णयों के क्रियान्वयन का आकलन किया। उन्होंने रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर की चीन यात्रा एवं चीनी रक्षा मंत्री से बातचीत के महत्व पर भी बात की। इस साल चीन जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है जबकि भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। श्री स्वरूप ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने भारत एवं चीन के बीच कारोबारी एवं निवेश के संबंधों के विस्तार की गति पर संतोष जताया। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। इस संदर्भ में चीनी विदेश मंत्री ने श्रीमती स्वराज को नाथू ला होकर जाने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा के लिये भारतीय तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि करने के चीन सरकार के निर्णय की जानकारी दी।

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