बिहार में तम्बाकू निरोध की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जरूरत : राज्यपाल - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

बिहार में तम्बाकू निरोध की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जरूरत : राज्यपाल

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पटना, 07 अप्रैल, बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने तंबाकू सेवन के खतरों से आगाह करते हुए आज कहा कि राज्य में नागरिकों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए काफी तेजी से तम्बाकू-निरोध की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी, ताकि तम्बाकू की खपत में तेजी से कमी लाई जा सके। श्री कोविंद ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर ‘तम्बाकू निरोध दिवस समारोह’को स्थानीय पारस- एच0 एम0 आर0 आई0 हॉस्पीटल के सभागार में कैंसर अवेयरनेस सोसाइटी एवं पारस हॉस्पीटल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यकम में कहा कि बिहार में 53.5 प्रतिशत लोग तम्बाकू का सेवन किसी-न-किसी रूप में करते हैं। पुरुषों में 100 में छियासठ लोग तम्बाकू का इस्तेमाल करते हैं और महिलाओं में चालीस। उत्तरपूर्वी राज्यों को यदि छोड़ दिया जाये, तो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में यह संख्या सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि राज्य में नागरिकों की स्वास्थ्य-रक्षा हेतु काफी तेजी से तम्बाकू-निरोध की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी, ताकि तम्बाकू की खपत में तेजी से कमी लाई जा सके। राज्यपाल ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि बिहार सरकार ने इस दिशा में कुछ प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने पूर्ण मद्य-निषेध का जो निर्णय लिया है, यह एक ऐतिहासिक कदम है, जिसकी प्रशंसा पूरे बिहार राज्य में हो रही है। इस निर्णय का बिहार के लोगों के स्वास्थ्य और उनके आर्थिक विकास पर बहुत सकारात्मक असर पड़ेगा। 

श्री कोविंद ने कहा कि प्रतिवर्ष तम्बाकू जनित रोगों से केवल बिहार में करीब एक लाख लोगों की मौत होती है। तम्बाकू-इस्तेमाल के कारण बिहार में सबसे ज्यादा मुँह और गले का कैंसर होता है एवं खैनी, गुटखा, पान-मसाला इत्यादि खाने से भी गरीब एवं निम्न मध्यम वर्ग के लोग कैंसर की इस जानलेवा बीमारी के शिकार बनते हैं। महिलाओं के लिए बच्चेदानी का कैंसर एक बड़ी समस्या है। इससे करीब 2,85,000 (दो लाख पच्चासी हजार) महिलायें पूरे विश्व में प्रतिवर्ष मरती हैं। राज्यपाल ने कहा कि इन करीब तीन लाख महिलाओं में से करीब 80 प्रतिशत तो सिर्फ भारत जैसे विकासशील देशों में ही अपने प्राण गँवाती हैं। बिहार जैसे राज्यों में भी बच्चेदानी के कैंसर से काफी संख्या में महिलाओं की मृत्यु होती है। इससे बचाव के लिए कन्याओं के टीकाकरण की बात सामने आई है। यदि यह टीकाकरण प्रभावी है तो इसे सरकारी एवं स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से बिहार में भी अपनाने पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों द्वारा तम्बाकू-सेवन के खतरों से आम जनता को अवगत कराने के लिए गंभीर जन-जागरूकता अभियान चलाने पर कुलपतियों की आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। कार्यक्रम को कैंसर अवेयरनेस सोसाइटी के अध्यक्ष टी.पी. सिन्हा, उपाध्यक्ष डा.ए. ए. हई समेत कई अन्य लोगों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान कैंसर रोग से अपनी प्राण-रक्षा कर चुके कई रोगियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए तम्बाकू एवं शराब सेवन नहीं करने की अपील की। 

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