नयी दिल्ली, 17 अप्रैल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जनता दल यूनाईटेड (जदयू)के नेता एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘संघ मुक्त भारत’ के आह्वान एवं भाजपा विरोधी दलों का गठजोड़ बनाने की अपील को सत्ता की व्याकुलता करार देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सवाल किया कि उनकी पार्टी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की इस गठबंधन में क्या भूमिका होगी। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि लोकतंत्र में गठबंधन बनाने में कोई बुराई नहीं है लेकिन सोचने वाली बात है कि बयानों में ‘हीरो और काम में ज़ीरो’ नेताओं का जमघट देश की विकास की प्रक्रिया को बाधित करने और भारत को सशक्त राष्ट्र बनने से राेकने के लिये तत्पर है। वे भारत को आर्थिक ताकत नहीं बनने देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने शासनकाल में गरीबी को खत्म करने एवं गांवों, किसानों और वंचित समुदायों के विकास के लिये अनेक ठोस कदम उठाये हैं।
सरकार पंचायतों को उनके क्षेत्र के विकास के लिये 80-80 लाख रुपये दिया जाना, जन-धन खाता, दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना, अटल पेंशन योजना, यूरिया की नीम कोटिंग, मुद्रा ऋण योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, ई-मंडी योजना आदि निर्णयों से देश के ग्रामीण एवं कृषि परिवेश को बदलने में लगी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में चीन सहित सभी देशों में आर्थिक वृद्धि दर घट गयी है लेकिन भारत की आर्थिक वृद्धि दर सबसे तेज़ हो गयी है। देश में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है। सरकार पर एक नये पैसे के भ्रष्टाचार का आरोप नही लगा है। इन्हीं बातों ने विपक्षी नेताओं के मन में गहरी निराशा और हताशा भर दी है और वे देश के आर्थिक विकास को रोकने के लिये लामबंद हो रहे है। श्री नीतीश कुमार ने कल इस गठजोड़ का एलान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे में श्रीमती गांधी जवाब दें कि इस तथाकथित भाजपा विरोधी गठजोड़ में कांग्रेस की क्या भूमिका होगी और कांग्र्रेस उपाध्यक्ष की क्या स्थिति होगी। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कहा था कि श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में भाजपा विरोधी दलों को लामबंद होना होगा। ऐसे में क्या श्री गांधी गठबंधन की अगुवाई करेंगे या फिर वह श्री नीतीश कुमार के पिछलग्गू बनेंगे।
श्री शर्मा ने कहा कि श्री नीतीश कुमार ने देश में सुशासन की बात की है। मगर वह यह नहीं बताते कि बिहार में कैसा सुशासन है। बिहार के आँगन में भ्रष्टाचार और अपराध का शासन है। श्री नीतीश कुमार श्री लालू प्रसाद यादव की खड़ाऊँ लेकर सत्ता में बैठे हैं जिन्हें अदालत ने भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया है। वह सीवान की जेल में बंद शहाबुद्दीन से मिलते हैं। इसलिये उन्होंने स्वयं को एक मौका परस्त नेता साबित किया है। भाजपा के इस युवा प्रवक्ता ने कहा कि श्री नीतीश कुमार ने संघ के बारे में बात करने से पहले सोचना चाहिये कि उन्होंने कितने साल भाजपा और संघ के साथ काम किया है। वह जानते हैं कि संघ पर जितना प्रहार होगा, संघ उतनी ही गति से बढ़ता जाएगा। लेकिन उनके बयान सत्ता को लेकर उनकी व्याकुलता एवं हनक का परिणाम हैं।

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