प्रद्योत कुमार,बेगूसराय। ज्योतिष के सम्बन्ध में एक आम अवधारणा है कि ज्योतिष का मतलब कोई पारलौकिक शक्ति से है लेकिन ये बात उतना ही सच है कि इसका पूरा वैज्ञानिक आधार है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है।सूर्य के ऑर्बिट में सारे ग्रहों का परिक्रमा करने को विज्ञान प्रमाणित कर चुका है और हर एक ग्रह का अपना एक रंग होता है और सूर्य से परावर्तित किरणें ज़मीन पर आती हैं साथ ही सूर्य की किरणों से मानव जीवन ही नहीं बल्कि प्राकृतिक चीज़ों का भी उतना ही गहरा सम्बन्ध है।सूर्य से जो पाराबैंगनी किरणें आती हैं उन्हीं ग्रहों के रगों से मानव जीवन प्रभावित है।प्रत्येक मानव के अंदर एक कलर सिस्टम है जिसका सीधा सम्बन्ध कुण्डलनी विज्ञान से है और प्रत्येक रंग का अपना एक प्रकृति है जिससे मानव जुड़ा हुआ है,जिन रंगों का फीडिंग मानव के अन्दर नहीं हो पाता है उस हिसाब से उस मानव के अंदर नाकारात्मक ऊर्जा पनपने लगता है जो आपके हाथों की लकीरें या और कई माध्यम हैं जिससे उसका पता सहज ही चल जाता है और उसी अनुरूप उस ग्रह का स्टोन दे दिया जाता है तब वो स्टोन उस कलर को सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरण से उस कलर को अवशोषित कर मानव के शरीर के अन्दर नसों के द्वारा भेज देता है और फिर धीरे धीरे साकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है और फिर मानव को उत्पन्न समस्या से निजात मिलने लगता है।प्रत्येक स्टोन खदान में मिलता है जिसका एक रसायनिक क्रिया है।यह एक बहुत ही कारगर उपाय है जिसे आध्यात्म से जोड़ कर मानव का भला किया जाता है लेकिन सही जानकारी के अभाव में ठगी ज़्यादा हो रहा है।
रविवार, 26 जून 2016
विशेष : ज्योतिष और विज्ञान में अन्योनाश्रय सम्बन्ध
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