विशेष : आसाम का आम्बु वाचि मेला और माँ कामाख्या की महिमा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 26 जून 2016

विशेष : आसाम का आम्बु वाचि मेला और माँ कामाख्या की महिमा

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आसाम के दौड़े पर आर्यावर्त रिपोर्टर अरुण कुमार की विशेष रिपोर्ट। गौहाटी आसाम के कामरूप जिले में स्थित माँ कामाख्या की भव्य मंदिर  है।इस मन्दिर का पट यूँ तो प्रत्येक महीने 04 दिनों के लिए बन्द स्वतः ही हो जाते हैं,पट बन्द होने के बाद इस पट को कोई भी ताकत खोल नहीं सकती।04 दिन पूरा होने पर स्वतः ही पट का खुल जाना अपने आप में आश्चर्य है,ये तो आम महीनों की बात है।कहते हैं जब से भगवती यहाँ कामरूप में स्थापित हुई हैं तभी से यह क्रिया स्वयम चलती आ रही है।आश्चर्य तो इस बात की है कि प्रत्येक वर्ष 22 जून को ही सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और माँ कामाख्या के गह्वर का पट बन्द हो जाता है।और वर्ष में एकबार इसी 22 जून को.जब पट बन्द होता है तो पानी रिसने के स्थान से रक्त निकलने लगता है,और इस बात का विज्ञान विद भी मूक दर्शक बना हुआ है अभी तक कोई टिका टिप्पणी तक नहीं किया है।वेद-शास्त्रादि के अनुसार भगवती सती अपने मायके उस वक़्त आईं जिस वक़्त उनके पिता राजा दक्ष यज्ञ करवा रहे  थे।यज्ञ स्थल आने के बाद भगवती स्वयं को यज्ञ के हवन कुण्ड में आहूत  कर दीं,क्यों कर दीं ये जग विदित है। भगवती सती जब हवन कुण्ड में कूदीं तो भगवान् शिव को अविलम्ब जानकारी मिली तो प्रभु ने अपने गण विरभद्रादि के साथ यज्ञ विध्वंस कर राज दक्ष के सिर भी धर से अलग कर दिए। 

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भगवान् शिव फिर वहाँ तांडव करने लगे और तांडव कार्य-करते भगवती के अर्द्धजले शरीर को कन्धे पर लेकर विनाश लीला करने त्रिभुवनों के विनाश के लिए चल पड़े।श्री विष्णु को जब जानकारी देवताओँ द्वारा मिली तो वे सर्व प्रथम सती के ही अंग को अपने सुदर्शन चक्र से काटना प्रारम्भ किए फिर जब शिव के कन्धों का भार हल्का हुआ तो फिर देवताओं द्वारा पूजा,अर्चना स्तुति पाठादि से शिव को मनाया गया और फिर सही सभी देवताओं को वर देते हुए स्वयं तपस्या में लीन हो गए।इधर भगवती के शारीर के 51 टुकड़े हुए,और भगवती के वे टुकड़े जहाँ-जहाँ गिरे वह स्थान शक्ति पीठ बन गए उन्ही शक्ति पीठों में एक हैं  माँ कामाख्या शक्ति पीठ।यहाँ भगवती का योनि गिरा था इसीलिए यहाँ प्रत्येक 22 जून को भगवती का पट बन्द रहता है क्योंकि इन समयों में भगवती रजस्वला होने के कारण पूर्ण विश्राम में रहती हैं।भगवती माँ  कामाख्या का गह्वर काफी नीचे है जबकि मन्दिर काफी ऊँचाई पर है। यहाँ दस महा विद्याओं के मन्दिर के साथ-साथ कोटि लिंग एयर भैरव  के रूप में श्री गणेश जी विराजमान हैं।जहाँ जहाँ शक्ति पीठ है,वहाँ वहाँ  भैरव के रूप में कहीं शिव तो कहीं गणेश विराजमान रहते हैं।यहाँ  भगवती काम के रूप में विद्यमान हैं इसलिए भी भगवती का नाम कामाख्या और,जिला का नाम कामरूप,कामाख्या पड़ा।यहां विश्व् के कोने कोने से तंत्रोपासक,अघोरी,कापालिक आदि सिद्धि प्राप्त करने आते हैं,और माता का प्रसाद,आशीर्वाद प्राप्त कर यश के भागी होते हैं। 

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यह तंत्र क्षेत्र है इसलिए यहाँ तांत्रिकों का तो जमाववाड़ा तो होता ही है, साथ ही माता के दर्शन के लिए विभिन्न प्रकार के कष्टी जो गृहश्थ आश्रम में हैं और किसी भी कष्ट से पीड़ित हैं तो उनकी कामना यहाँ अवश्य ही  पूर्ण होती हैं।यहाँ दसों महाविद्याओं के अलग अलग मन्दिर है जिसमे  सबसे ऊपर माँ भुवनेश्वरी की मन्दिर है।दस महाविद्याओं में हैं-काली, तारा,छिन्नमस्तिका,श्री षोडशी,भुवनेश्वरी,त्रिपुर भैरवी,धूमावती, वगलामुखी और मातंगी माता के साथ साथ श्मशान में संकटा देवी भी  विराजमान हैं। यहां पर श्मशान और कुमारी पूजन का विशेष मान्यता है। यहाँ 25 तारीख के रात्रि बीतने पर पट स्वयं निश्चित समय पर खुल  जाएगा फिर पट खुलने पर भैरवी तत्पश्चात् प्रधान पुजारी पूजा करेंगे  फिर दर्शनार्थियों का दर्शन प्रारम्भ होगा। यहाँ मशानियों के लिए बाबा  भूतनाथ मन्दिर भी पूर्ण शक्तियों का श्रोत हैं।दर्शनार्थी एवं साधकों के लिए  यह मान्यता है कि जो भी माँ कामाख्या का दर्शन कर लेते हैं उन्हें  उमानंदा महादेव का भी दर्शन करना चाहिए,नहीं तो माता का पूजन और दर्शन अधूरा माना जाता है!आज पट बन्द हुए तीसरा दिन है और  आज अभी अभी संध्या के 6:15 तक लगभग आसाम न्यूज के अनुसार दस लाख की भीड़ माँ कामाख्या के दर्शन के लिए आ चुकी है।दर्शन रविवार के प्रातः 07:00बजे से शुरू होंगे।जबकि आज,कल और परसों यानी शनि और रविवार को और भी दर्शनार्थियों का आना रहेगा ही,यहाँ हर कोई कुछ न कुछ माता रानी से माँगने आते हैं और सभी अपनी अपनी झोली भरके ही जाते हैं।ऐसी महिमा है कामरूपी माँ कामाख्या की।

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