एथलीटों से चमत्कार की कोई उम्मीद नहीं: अश्विनी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 24 जून 2016

एथलीटों से चमत्कार की कोई उम्मीद नहीं: अश्विनी

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नयी दिल्ली, 24 जून, उड़नपरी पी टी ऊषा को हराकर तहलका मचाने वाली मशहूर धाविका अश्विनी नचप्पा को रियो ओलंपिक में भारतीय एथलीटों से किसी तरह के चमत्कार की कोई उम्मीद नहीं है और उनका मानना है कि यदि कोई भारतीय एथलीट फाइनल में पहुंच जाए तो यही बड़ी उपलब्धि होगी। नचप्पा ने अक्षरधाम स्पोर्ट्स काम्पलैक्स में ‘अब दौड़ेगा हिंदुस्तान’ के मेगा फाइनल में युवा एथलीटों के प्रदर्शन को देखने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा“ मुझे कोई ऐसा एथलीट नजर नहीं आ रहा है जो रियो ओलंपिक में देश के लिये पदक जीत सके। पदक जीतना तो दूर की बात है कोई एथलीट फाइनल में भी पहुंच जाये वह भी बड़ी बात होगी।” 48 वर्षीय पूर्व धाविका ने कहा“ विकास गौड़ा और सीमा अंतिल से कुछ उम्मीद की जा सकती है कि वे रियो ओलंपिक में डिस्कस थ्रो की अपनी स्पर्धाओं के फाइनल तक पहुंच जाए । बाकी एथलीटों के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। वे ज्यादा से ज्यादा दूसरे राउंड या सेमीफाइनल तक पहुंच सकते हैं। लेकिन एक बात साफ है कि पदक जीतने की कोई संभावना नहीं है।” कर्नाटक के कुर्ग में अश्विनी स्पोर्ट्स फाउंडेशन चला रही अश्विनी ने 1987 में दिल्ली में इंटरनेशनल परमिट मीट में पी टी ऊषा को हराकर तहलका मचाया था और उसके बाद से ही वह सुर्खियों में आ गईं। उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को आड़े हाथों लेते हुये उसे एक इवेंट मैनेजर करार दिया। उन्होंने कहा“ फेडरेशन एथलीटों के लिये कुछ नहीं कर रहा है जबकि सरकार एथलीटों को पूरी मदद दे रही है। फेडरेशन का काम तो इवेंट मैनेजर जैसा हो गया है कि इवेंट कराओ और एथलीटों के बारे में कुछ मत सोचो।”

भारतीय खेल प्राधिकरण(साई) परिषद की सदस्य अश्विनी का कहना है कि एथलीटों को तैयार करने के लिये बी और सी टीमों को भी मजबूत करना होगा लेकिन दुर्भाग्य से यह काम नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा“ कोचों और खिलाड़ियों को जवाबदेह बनाने की जरूरत है। उनके सामने लक्ष्य रखने होंगे और उन्हें यह बताना होगा कि यदि आप इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाते हैं तो आपको दी जा रही मदद बंद कर दी जाएगी।” अश्विनी ने साथ ही महिला एथलीटों के पतियों को कोच बनाकर द्रोणाचार्य अवार्ड मिलने पर भी कटाक्ष करते हुये कहा“ यह देखकर हास्यास्पद लगता है कि सब लोग कोच ही बन गये हैं। एक एथलीट को तैयार करने पर द्रोणाचार्य दे दिया जाता है जबकि उसमें उसकी कोई भूमिका नहीं होती है। जब तक आप पांच ऊषा, पांच अश्विनी और पांच अंजू जार्ज तैयार नहीं करते तब तक आपको द्रोणाचार्य बनने का हक नहीं है।” पूर्व एथलीट ने कहा“ 2020 और 2024 के ओलंपिक में यदि पदक जीतना है तो अभी से योजना बनानी होगी और आधारभूत ढांचा तैयार करना होगा। हमारे समय में भारतीय एथलीटों के बीच ही स्पर्धा होती थी। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिलता है, ट्रेनिंग मिलती है लेकिन परिणाम सामने नहीं आते। जब तक हम एथलेटिक्स में क्रिकेट टीम की विश्वकप जैसी सफलता हासिल नहीं करेंगे तब तक इस खेल में हम हमेशा पिछड़े रहेंगे।” 

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