बिहार : टाॅपर्स घोटाले के खिलाफ माले ने किया तीन दिवसीय प्रतिरोध कार्यक्रम की घोषणा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 25 जून 2016

बिहार : टाॅपर्स घोटाले के खिलाफ माले ने किया तीन दिवसीय प्रतिरोध कार्यक्रम की घोषणा


  • घोटालेबाजों की संपत्ति जब्त करे सरकार

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पटना 23 जून 2016 भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि टाॅपर्स घोटाले के राजनीतिक संरक्षण की संपूर्णता में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच के सवाल पर 26-28 जून तक हमारी पार्टी ने राज्यव्यापी तीनदिवसीय आंदोलन की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि ‘टाॅपर्स घोटाले’ ने बिहार के शैक्षणिक जगत में चल रहे संस्थागत भ्रष्टाचार को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है. यद्यपि लालू यादव के शासनकाल में ही वित्तरहित शिक्षा की शुरूआत हुई, लेकिन पिछले 11 वर्षों से ‘शिक्षा सुधार’ के नाम पर बिहार में जो खेल चल रहा है, उसमें इस तरह के घोटालों को सामने आना ही था.  बिहार में जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार थी, जब नीतीश कुमार ने शिक्षा सुधार के लिए मुचकुंद दूबे आयोग का गठन किया था. आयोग ने समान स्कूल प्रणाली की सिफारिश की. लेकिन नीतीश कुमार ने आयोग की सिफारिशों को सिरे से नकारकर ठीक इसके विपरीत शिक्षा में निजी पंूजी को खुलकर बढ़ावा दिया. इसी का नतीजा हैै कि आज प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा महज एक खरीद-पफरोख्त की वस्तु बन गयी है. 

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा पर माफियाओं ने कब्जा जमा लिया है, महंगे प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ आ गयी है और छात्रों को चूस लेने के लिए कुकुरमुत्ते की तरह कोचिंग संस्थान उग आए हैं. वित्तरहित काॅलेजों से कहा गया कि जो जितना बेहतर परिणाम देगा, सरकार उसे उसी अनुरूप सहायता देगी. नतीजा यह हुआ कि ये वित्तरहित काॅलेज डिग्रियां खरीदने लगे. इंटरमीडिएट को स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन वहां योग्य शिक्षकों की बहाली नहीं की गयी. और इस तरह पढ़ाई को चैपट कर डिग्रियां खरीदेने की परंपरा को खुल कर प्रोत्साहित किया गया.

 सरकारी संरक्षण में घटित इस घोटाले ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है, जिसमें जदयू-भाजपा-राजद नेताओं समेत शिक्षा मापिफयाओं का एक पूरा तंत्र शामिल है. इस समूचे तंत्र ने मिलकर बिहार के युवाओं का भविष्य अंध्ेारे में ढकेल दिया है. यहां के युवक-युवतियों की मेहनत व लगन से हासिल डिग्रियों पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं और आज दूसरे प्रांतों में अनावश्यक तौर पर प्रताड़ित हो रहे हैं. इतना ही नहीं, मेडिकल-इंजीनियरिंग जैसी उच्चतर शिक्षा में दलित-ओबीसी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति में भी भारी कटौती की जा रही है, जिसकी वजह से छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हो रहे हैं. शिक्षा को गत्र्त में ढकेलने वाली यह सरकार नौजवानों से किए वादों से भी लगातार विश्वसाघात कर रही है. न तो नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार मिल रहा है और न ही बिना शत्र्त बेरोजगारी भत्ता. ऐसी स्थिति में बिहार के छात्रा-युवा पलायन को आज भी मजबूर हैं.

 प्रत्येक नागरिक के लिए शिक्षा व रोजगार उपलब्ध् कराना सरकार का संवैधनिक दायित्व है. लेकिन जो कुछ चल रहा है. वह सामाजिक न्याय, लोकतांािक अधिकार और मानवीय मूल्यों का सृजन करने वाली शिक्षा व्यवस्था से पूरी तरह विश्वासघात है. इसके खिलाफ हम सबको आगे आना होगा और एक लंबी लड़ाई में उतरना होगा. इसकी शुरूआत करते हुए हमने 26-28 जून तक पूरे बिहार में तीन दिवसीय विरोध् का कार्यक्रम लिया है. 
मांगे ंः  

1. टाॅपर्स घोटाले के राजनीतिक संरक्षण की संपूर्णता में उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराओ!
2. न्यायिक जांच में राष्ट्रीय ख्याति के शिक्षाविद् को शामिल करो!
3. टाॅपर्स घोटालेबाजों की संपत्ति जब्त करो!
4. भ्रष्टाचार को संस्थाब( बढ़ावा देने वाली शिक्षा नीति वापस लो, मुचकुंद दूबे आयोग की सिपफारिश ;समान स्कूल प्रणालीद्ध लागू करो!
5. दलित-ओबीसी के छात्रों की छात्रावृत्ति कटौती वापस लो!
6. कैंपसों में लोकतंत्रा बहाल करो, छात्रों पर दमन बंद करो!
7. सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करो, बिना शर्त न्यूनतम 5000 रु. बेरोजगारी भत्ता दो!
8. तमाम रिक्त पदों पर अविलंब स्थायी बहाली करो!
9. ठेका-मानदेय कर्मियों को स्थायी करो!
10. बिहार के डिग्रीधारी युवक-युवतियों को अनावश्यक प्रताड़ित किए जाने के खिलापफ नीतीश सरकार संज्ञान ले और ठोस कदम उठाये! 

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