पटना 24 जून, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताया और कहा कि यह कोई गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नहीं है जो एक समय सीमा के बाद बंद कर दिया जाये । श्री यादव ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि पिछले तीन जून को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति में पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिये आरक्षण समाप्त कर दिया गया । लोगों में यह शंका घर कर गयी है कि नियमों एवं प्रावधानों की अनदेखी करते हुए जानबूझ कर पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों की हकमारी की जा रही है। राजद अध्यक्ष ने कहा कि इस अविश्वास की स्थिति का अंत करने लिये मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इस विषय में पूरी जानकारी लेकर प्रधानमंत्री को अपना विचार स्पष्ट करना चाहिए । साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि केन्द्रीय विद्यालयों में पिछड़े , दलित और आदिवासी वर्ग से कितने प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्तियां की गयी है तथा उन्हें मिलने वाली आरक्षण के अनुपात में है या नहीं ।
श्री यादव ने कहा कि यह सर्वविदित है कि सुनियोजित तरीके से आरक्षण के हकदारों को इससे वंचित किया जाता है । बहुसंख्यक वर्ग यह जानने का इच्छुक है कि प्रधानमंत्री इस सच्चाई से अवगत है या नहीं । उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व ही अनुसूचित जनजातियों के विद्यार्थियों को मिलने वाली फेलोशिप को भी यह कह कर रोक दिया गया कि इसके लिये राशि की कमी है । यह देखा गया है कि कम राशि का हवाला कमजोर वर्ग के लोगों से जुड़ी योजनाओं में ही देखने को मिलता है । राजद अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र सरकार के पास लगभग 650 आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा में फेलोशिप देने के लिये 80-85 करोड़ रूपये नहीं है । वहीं दूसरी ओर सरकार की नाक के नीचे हजारों करोड़ का घालमेल कर बड़े-बड़े उद्योगपति आसानी से विदेश भाग जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि गत वर्ष हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की वैचारिक संस्था राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(आरएसएस) के प्रमुख ने आरक्षण को समाप्त करने की बात कही थी । श्री यादव ने कहा कि उस बयान के बाद सरकार के इन कदमों को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि केन्द्र सरकार आरएसएस के बताये हुए मार्ग पर चल रही है । कभी आप (श्री मोदी ) आरक्षण के लिये अपनी जान देने की बात कर रहे थे और अब सरकार कुरेद-कुरेद कर आरक्षण की नींव खोखली करने में लगी है । उन्होंने कहा कि जब देश में व्याप्त असमानता , ऊंच -नीच और छुआछूत आर्थिक नहीं है तो फिर सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण की पक्षधर क्यों बनी है ।
राजद अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नहीं ,बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है । उन्होंने कहा कि वह बिमारी को समाप्त करने की बात करते है लेकिन केन्द्र सरकार पहले इलाज ही बंद कर रही है । जब पीड़ा और बीमारी ही समाप्त हो जायेगी तो इलाज बंद करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी ।चोरी छुपे आरक्षण हटाने की यह दक्षिणपंथी चाल शायद एक बहुत बड़े निणर्य के पहले देश की बहुसंख्यक आबादी के संयम एवं प्रतिक्रिया को नापने -तौलने की कोशिश है । श्री यादव ने कहा कि वह आंदोन करके ही राजनीति में आये हैं और उनके लिये राजनीति आंदोलन का दूसरा नाम है । मंडल आयोग की अनुशंसाओं को लागू कराने के लिये वह सड़क पर उतरे थे । उन्होंने कहा कि आज भी मंडल आयोग की कई सिफारिशों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया है । राजद अध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण और मंडल आयोग के जिन प्रावधानों को लागू किया गया है, यदि उसपर आंच आने लगे , तो वह सड़कों पर उतरने में क्षण भर भी नहीं सोचेंगे । उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हजारों वर्षो तक तिरस्कार और जिल्लत सहा हो , उनको मिलने वाली आरक्षण से 20 -25 वर्ष में ही लोगों को इतनी तकलीफ पहुचने लगी है ।

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