कोयला उत्पादन का निगरानी तंत्र कमजोर : कैग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 27 जुलाई 2016

कोयला उत्पादन का निगरानी तंत्र कमजोर : कैग


नयी दिल्ली 26 जुलाई, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के उत्पादन की निगरानी व्यवस्था की तीखी आलोचना करते हुये कहा कि जाँच के दौरान पूर्व आवंटियों की ओर से उपलब्ध करवाए गये उत्पादन आँकड़ों में अंतर पाया गया जो निगरानी तंत्र की कमजोरी को प्रदर्शित करता है। 

कैग की संसद में आज पेश रिपोर्ट में कहा गया कि चार राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में 19 कंपनियों को पहले आवंटित किये गये कोयला खदानों में से आठ पूर्व आवंटियों के उत्पादन आँकड़ों में अंतर पाया गया। दो पूर्व आवंटियों द्वारा राज्य सरकारों को उपलब्ध कराये गये उत्पादन अाँकड़ों की तुलना में काेयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) को दिये गये कोयला उत्पादन की मात्रा कम थी। 

रिपोर्ट के अनुसार, मोनेट इस्पात एनर्जी लिमिटेड को छत्तीसगढ़ स्थित गारे पालमा IV/5 खदान का आवंटन किया गया था। उसने राज्य सरकार को बताया कि इस खदान से 865700.5 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ वहीं उसने सीसीओ को 857310.5 करोड़ टन कोयला उत्पादन का आँकड़ा उपलब्ध कराया जो राज्य सरकार को बताई गई मात्रा से 839 करोड़ टन कम था। इससे इस पर लगने वाली लेवी में भी 2.48 करोड़ रुपये का अंतर आया। 

इसी तरह पश्चिम बंगाल स्थित अर्धग्राम कोयला ब्लॉक का आवंटन सोवा इस्पात लिमिटेड तथा जय बालाजी स्पांज को किया गया था। उन्होंने राज्य सरकार को 76491.6 करोड़ टन और सीसीओ को 73341.6 करोड़ टन कोयला उत्पादन का आँकड़ा दिया, जो राज्य सरकार को उपलब्ध कराये गये आँकड़े से 315 करोड़ टन कम था। इससे लेवी 0.93 करोड़ रुपये संग्रहित हुई। 

रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर पिछले साल सितंबर में सीसीओ ने अपने जवाब में कहा कि पूर्व आवंटियों द्वारा दी गई कोयला उत्पादन की सांख्यिकी रिटर्न के आधार पर अतिरिक्त लेवी संग्रहित की गई। उसके पास उत्पादन आँकड़ों की प्रमाणिकता को जाँचने का कोई अन्य तंत्र उपलब्ध नहीं था। 

कैग ने कहा कि 42 में से 39 खदानों ने 34.46 करोड़ टन का उत्पादन किया। इस पर पूर्व आवंटियों को 10165.12 करोड़ रुपये लेवी जमा कराना था लेकिन मई 2016 तक वे केवल 6628.56 करोड़ रुपये ही संग्रहित किये जा सके।

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