पटना 01 अगस्त, बिहार विधान परिषद में मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नयी डोमिसाइल नीति लागू करने और व्याख्याताओं की हो रही साक्षात्कार पर रोक लगाये जाने की मांग को लेकर भारी शोरगुल और नारेबाजी की जिसके कारण सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी गयी । सभापति अवधेश नारायण सिंह के आसन ग्रहण करते ही भाजपा के रजनीश कुमार ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि बिहार में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संशोधित दिशा निर्देश को लागू नहीं किया गया । उन्होंने कहा कि इसके लागू नहीं किये जाने के कारण प्रदेश के लगभग 30 हजार पीएचडी धारकों को बहाली में मौका नहीं मिला है। इसी दौरान भाजपा के ही प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने कहा कि बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित की गयी सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में बिहार के युवाओं को अवसर नहीं मिल पा रहा है और बिहार के बाहर के 80 प्रतिशत लोगों की नियुक्ति हो रही है । सभापति ने इस मामले को शून्यकाल में उठाने का आग्रह किया जिसके बाद सदस्य अपनी- अपनी सीट पर बैठ गयें ।
शून्यकाल के शुरु होते ही श्री कुमार और श्री यादव ने इस मामले को फिर से उठाया । इस पर सभापति ने कहा कि श्री यादव के सवाल पर सरकार की ओर से तीन अगस्त को जवाब दिया जायेगा । वहीं सभापति ने श्री कुमार के सवाल को परिषद की कार्य संचालन नियमावली के अनुकूल नहीं पाते हुए अस्वीकृत कर दिया । सभापति के इतना कहते ही भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव , सूरज नंदन मेहता , रजनीश कुमार , विनोद नारायण झा , अर्जुन सहनी , कृष्ण कुमार सिंह और आदित्य नारायण पांडेय समेत अन्य सदस्य सदन के बीच में आ गये । भाजपा सदस्य .. डोमिसाइल नीति लागू करो.. का नारा लगाने लगे । सदन को अव्यवस्थित होते देख सभापति ने कार्यवाही को भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी । बाद में परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने अपने कक्ष में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सत्तारुढ़ महागठबंधन के बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार के लोगों को नौकरियों में 80 प्रतिशत स्थान दिये जाने की वकालत की थी जिसका बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी समर्थन किया था । बिहार सरकार को जल्द से जल्द डोमिसाइल नीति लागू करनी चाहिए जिससे कि यहां लोगों को सरकारी नौकरियों में लाभ मिल सके ।
श्री मोदी ने कहा कि राज्य में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति चल रही है जिसमें 30 हजार पदों पर बहाली होनी है । लगभग 13 वर्ष के बाद सहायक प्राध्यापकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है । उन्होंने कहा कि इस बहाली में 80 प्रतिशत अन्य राज्यों के अभयर्थी है । प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि मैथिली ,अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र , दर्शनशास्त्र , गणित और भौतिक शास्त्र के विषयों का साक्षात्कार हो गया है तथा अभी भी 35 विषयों के लिए साक्षात्कार होना बाकी है । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने चार मई 2016 को नया दिशा-निर्देश जारी किया था जिसे बिहार में लागू नहीं किया गया जबकि सदन में विभागीय मंत्री ने इसे लागू करने की बात कही थी । श्री मोदी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नये दिशा-निर्देश को लागू नहीं किये जाने के कारण आज बिहार के 34 हजार पीएचडी धारक अभ्यर्थी इस साक्षात्कार में शामिल नहीं हो पा रहे हैं । यदि आयोग का नया दिशा-निर्देश लागू कर दिया गया होता तो सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में बिहार के पीएचडी धारकों के लिए रास्ता साफ हो जाता । प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार और राजद अध्यक्ष श्री यादव यदि इस मामले में गंभीर है तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नये दिशा-निर्देश को लागू कराये और साक्षात्कार पर तत्काल रोक लगाये ।

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