शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं का समन्वित विकास : कोविंद - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 10 अगस्त 2016

शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं का समन्वित विकास : कोविंद

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पटना, 9 अगस्त, बिहार के राज्यपाल राम नाथ कोविंद ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए आज कहा कि शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक क्षमताओं का समन्वित विकास और राष्ट्रीय आदर्शों के अनुरूप चरित्र का निर्माण है। श्री कोविंद ने यहां सुभाष इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सभागार में आयोजित ‘सत्रारंभ समारोह-2016’ को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सदी ज्ञान एवं तकनीक आधारित सदी है। हर एक इंसान को आज इतना ज्ञान और तकनीकी कौशल पाने का अवसर जरूर मिलना चाहिए कि वो अपने विवेक और कौशल से समाज को बेहतर बनाने में सहयोग दे सके। शिक्षण संस्थानों को महज सामान्य शिक्षा देने के बजाय, एक ऐसे ज्ञान का केन्द्र बनने की ओर अग्रसर होना चाहिए, जहाँ हमारे छात्र शोध कार्यो में में भी अव्वल आ सके। राज्यपाल ने कहा कि आज के सामाजिक परिवेश में युवाओं को इतना दूरदर्शी और कर्मठ बनना है कि आने वाले वक्त में परिवर्तन की धार को वे एक सकारात्मक दिशा दे सकें। देश की युवा शक्ति ही इस महान देश को बुलंदियो के शिखर पर ले जा सकती है। 

श्री कोविंद ने कहा कि देश-काल के साथ-साथ, उच्च शिक्षा ने भी एक लंबा सफर तय किया है। वैश्विक अपेक्षाओं तथा चुनौतियों का सामना आज शिक्षा-व्यवस्था को करना पड़ रहा है। शिक्षा का उद्देश्य शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक क्षमताओं का समन्वित विकास तथा राष्ट्रीय आदर्शों के अनुरूप चरित्र का निर्माण है। साथ ही उसे दुनियाँ की जरूरतों के अनुरूप भी खरा उतरना है और गुणवत्तापूर्ण बनना है। राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के प्रति लगाव रखने वाले युवा वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिये पहले बिहार से बाहर जाने की मजबूरी थी। इस तरह के संस्थाओं की बदौलत तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है। इस संस्थान की स्थापना से आज कुशल और मेधावी छात्र कुशल इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ बनकर देश की सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डा. समरेन्द्र प्रताप सिंह के कहा कि समयबद्धता और अनुशासनशीलता विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त आवश्यक है । कार्यक्रम में बीआईटी, मेसरा के पूर्व कुलपति, प्रो एच सी पाण्डेय ने भी अपने विचार व्यक्त किये । 

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