नई दिल्लीः हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में भारत में पहली बार सोसायटी ऑफ मिनिमली इंवेसिव कार्डियोवास्कुलर एंड थोरेसिक सर्जन्स ने विश्व स्तर की कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। दिल्ली के एयरोसिटी में जे डब्ल्यू मैरियट होटल में हुई इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी के संबोधन से हुइ। बाल श्रम के खिलाफ देश-दुनिया में झंडा बुलंद करने वाले कैलाश सत्यार्थी ने कॉन्फ्रेंस में शिरकत कर रहे डॉक्टर्स से आम जनता के हितों के लिए काम करने की सलाह दी।. श्री सत्यार्थी ने उम्मीद जताई कि दुनिया भर में नाम कमा रहे भारतीय डॉक्टर्स बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में भी अपनी भूमिका निभाएंगे.
भारत में अपनी तरह की इस पहली कॉन्फ्रेंस का आयोजन पायसुनी फाउंडेशन ने किया था। 18 हजार से ज्यादा हार्ट सर्जरी कर चुके दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के डॉक्टर युगल मिश्रा के प्रयासों से सोसायटी ऑफ मिनिमली इंवेसिव कार्डियोवास्कुलर एंड थोरेसिक सर्जन्स ने पहली कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसका मकसद परंपरागत ओपन हार्ट सर्जरी की जगह मिनिमली इंवेसिव कार्डियोवास्कुलर सर्जरी या की-होल सर्जरी को बढ़ावा देना था. कॉन्फ्रेंस में शामिल जर्मनी और अमेरिका से आए डॉक्टर्स ने भारतीय डॉक्टर्स के साथ अपने रिसर्च के नतीजों को साझा किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आए केंद्रीय कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि डॉक्टर्स को स्वास्थ्य सुविधाओं को समाज के पिछड़े तबके तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. इसके लिए विशेष तौर पर ऐप भी विकसित किए जा सकते हैं। कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे डॉक्टर्स का आह्वान किया कि वो पेशेवर तौर पर प्रैक्टिस भी जरूरी है लेकिन डॉक्टर्स को विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना जीवन में नैतिक मूल्यों में गिरावट न आए, क्योंकि आज भी देश में डॉक्टर्स को भगवान का दर्जा प्राप्त है. ऐसे में डॉक्टर्स पर समाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ज्यादा हो जाती है.

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