राजनाथ ने घर में घुसकर जिस तरह पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाते हुए पुरी दुनिया के सामने आतंकवाद के मसले पर उसे बेनकाब किया है वह भारत के लिए गर्व की बात है। लेकिन पाकिस्तान ने उनकी मेहमानवाजी में जो बर्ताव किया है वह वह ना सिर्फ सार्क, पाकिस्तानी मीडिया बल्कि अंतराष्ट्रीय राजनीतिक व कूटनीतिक के मंच पर बरते जाने वाले शिष्टाचार के लिहाज से भी इतिहास में बेहद शर्मनाक पन्नों में जोड़ा जायेगा। 1947 में बंटवारे के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय मंत्री ने पाकिस्तान को उसकी जमीन पर ही इस तरह लताड़ लगाई हो
बेशक, आतंकियों को तमाम धमकी के बाद भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान जाना और उसी की धरती पर आतंकवाद के मसले पर उसके काले कारनामों का चिठ्ठा खोलना साहसभरा कदम नहीं तो और क्या है? भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान की सरजमी पर हाफिज सईद जैसे आतंकवादी पूरी लौह लश्कर के साथ वहां की सड़कों पर उतरकर खुलेआम धमकी देता फिर रहा था और ऐसे माहौल में राजनाथ सिंह न सिर्फ गए बल्कि आतंकवाद के उसके दोहरे चरित्र की कलई खोलकर रख दी, वह अपने आप में सराहनीय है। ये अलग बात है कि पाकिस्तान ने राजनाथ के मेहमानवाजी में जो किया वह दुनिया के इतिहास में काले अक्षरों से लिखा जायेगा। या यूं कहें पाकिस्तान ने जो किया वह ना सिर्फ सार्क, पाकिस्तानी मीडिया बल्कि अंतराष्ट्रीय राजनीतिक व कूटनीतिक के मंच पर बरते जाने वाले शिष्टाचार के लिहाज से भी इतिहास में बेहद शर्मनाक पन्नों में जोड़ा जायेगा। क्योंकि पड़ोसी देश में सार्क सदस्य के रुप में भारत के गृहमंत्री की हैसियत से पहुंचे थे। हो जो भी पाक को डर था कि राजनाथ तथ्यों के साथ उसकी बखिया उधेड़ने वाले हैं।
फिरहाल पाकिस्तान में सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को आईना दिखा दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा और सबसे बड़ी चुनौती है। राजनाथ ने काबुल, ढाका और भारत के पठानकोट में आतंकी हमले का भी मुद्दा उठाया। खासकर जिस तरह गृहमंत्री बेखौफ होकर काबुल, ढाका और पठानकोट में हुए आतंकी हमलों का जिक्र कर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, आतंकवादियों को शहीदों के रूप में महिमामंडन या प्रशंसा नहीं की जानी चाहिए। अब आतंकवाद का खात्मा बेहद जरूरी हो गया है। आतंकी संगठनों के साथ उन्हें सपोर्ट करने वाले देशों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, तभी आतंकवाद पर लगाम लगेगा। “अच्छा आतंकवाद और बुरा आंतकवाद नहीं होता और ना ही अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी होते हैं। ”आतंकवाद को बढ़ावा देने और पनाह देने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सिर्फ आंतक की आलोचना काफी नहीं. आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों को अलग करें”। पुरी दुनिया में आतंकवाद की फैक्ट्री के रुप में ख्याति प्राप्त कर चुके पाकिस्तान पर नकेल कसे बगैर आतंकवाद से लड़ाई संभव नहीं हैं। ऐसे बोल पाकिस्तान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मंच पर बोलना राजनाथ के बूते की ही बात है। शायद यही वजह रहा कि जब राजनाथ का भाषण शुरु हुआ तो भारत समेत पाकिस्तानी मीडिया कवरेज पर भी रोक लगा दी गयी।
जहां तक राजनाथ के मेहमाननवाजी का सवाल है तो इस्लामाबाद में पाकिस्तान के होम मिनिस्टर्स के सार्क कॉन्फ्रेंस में सिर्फ तल्खी ही देखने को मिली। वहां भारत-पाक के होम मिनिस्टर्स आमने-सामने तो हुए, पर फॉर्मल हैंडशेक तक नहीं किया। हालांकि उनके इस हरकत पर ही वहां के होम मिनिस्टर चैधरी निसार की ओर से दिए गए लंच का राजनाथ ने बहिष्कार किया और तुरंत वे दिल्ली लौट आए। बता दें, सार्क सम्मेलन की शुरुआत 8 दिसंबर, 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान ने मिलकर की थी। तभी से विभिन्न देशों में समय-समय पर सार्क सम्मेलन होते रहे है। इस सम्मेलन में अंतराष्ट्रीय मसलों के साथ-साथ देशों के लोग अपनी समस्याओं को भी रखते है। ‘यह सम्मेलन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच उपलब्ध करवाता है।’ गौर करने वाली बात यह है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वानी की न सिर्फ तारीफ की थी बल्कि यह भी कहा था कि ‘कश्मीर एक दिन पाकिस्तान बन जाएगा।’ इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि उनका (नवाज शरीफ का) राज्य को अपने देश (पाकिस्तान) का हिस्सा बनाने का सपना ‘कभी पूरा नहीं होगा..कायनात के खत्म हो जाने पर भी नहीं।’
(सुरेश गांधी)

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