नयी दिल्ली 08 अगस्त, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने दलितों पर अत्याचारों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को राजनीति से प्रेरित करार देते हुए आज कहा कि उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वाह करना चाहिए।
सुश्री मायावती ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री को भावुक होने की जरुरत नहीं है। वह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से अखबारों की सुर्खियां तो बटोरी जा सकती है लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने कल हैदराबाद में ऊना में दलितों के साथ मारपीट के मुद्दे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था, ‘‘ मेरे दलित भाईयों को मारना बंद करो। यदि मारना है तो मुझे मारो।”
सुश्री मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। उन्हें बार बार भावुक होने की जरुरत नहीं है बल्कि उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए। देश और राज्यों में कानून का शासन सख्ती से स्थापित करना चाहिए जिससे लोगों को इंसाफ मिले सके। उन्होंने कहा, “ यह कोई अहसान नहीं है बल्कि उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।’’ श्री मोदी पर देर से बोलने का आरोप लगाते हुए सुश्री मायावती ने कहा कि वह देश की ज्वलंत समस्याओं पर कभी नहीं बाेलते। जिसके कारण हालात बिगड जाते हैं और जब बोलते हैं तो ऐसा बोलते हैं उससे समस्या सुलझने की बजाय और ज्यादा उलझकर मुश्किल हो जाती है। उन्होंने कहा कि दलितों को प्रधानमंत्री की सहानुभूति की जरुरत नहीं है बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। राज्यों को इस संबंध में कडे निर्देश जारी किए जाने चाहिए। नकली गौरक्षकों से संबंधित श्री मोदी के बयान पर बसपा प्रमुख ने कहा कि ऊना कांड के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं होने के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

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